इन दो गांवों में 150 साल से नहीं मनाई जाती होली, जानिए वजह?
<p>कल होली का त्योहार आ रहा है। इस साल रंगों से खेलने के लिए हर कोई उत्साहित है। कई इसकी तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन, भारत में दो ऐसे जिले हैं जहां के गांव में पिछले 150 सालों से होली नहीं खेली गई है।ये दोनों गांव छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित हैं। इस गांव में होली पर मिठाइयां तो बनती हैं लेकिन होलिका दहन और गुलाल नहीं खेला जाता है।जिले का पहला गांव खरहरी कोरबा जिले से 35 किमी दूर है। यह à</p>
04:59 PM Mar 06, 2023 IST
कल होली का त्योहार आ रहा है। इस साल रंगों से खेलने के लिए हर कोई उत्साहित है। कई इसकी तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन, भारत में दो ऐसे जिले हैं जहां के गांव में पिछले 150 सालों से होली नहीं खेली गई है।
ये दोनों गांव छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित हैं। इस गांव में होली पर मिठाइयां तो बनती हैं लेकिन होलिका दहन और गुलाल नहीं खेला जाता है।
जिले का पहला गांव खरहरी कोरबा जिले से 35 किमी दूर है। यह मां मदवारानी मंदिर के पास एक पहाड़ी के नीचे स्थित है। इस गांव में पिछले 150 साल से होली न खेलने के पीछे गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गांव में उनके जन्म से पहले ही होली न खेलने की प्रथा है। इस गांव में 650 से 750 लोग रहते हैं।
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक कई साल पहले गांव में बड़ी आग लगी थी। गांव में हालात और खराब हो गए थे। उसके बाद गांव में महामारी शुरू हो गई। इससे गांव के लोगों को काफी परेशानी हुई।
उसी समय गांव के एक हकीम के सपने में देवी मां मदवारानी प्रकट हुईं। उन्होंने इस बैगा को संकट से निकलने का रास्ता दिया। देवी ने सलाह दी कि गांव में होली कभी न मनाएं, तभी गांव में शांति आएगी।
तब से गांव में कभी होली नहीं मनाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि यहां न होलिका दहन होता है और न ही रंग लगाया जाता है।
यदि वे नियम तोड़ते हैं और रंग गुलाल खेलते हैं, तो वे देवी के कोप का भागी होंगे। आज भी लोग मानते हैं कि वे बीमार पड़ते हैं। उनके चेहरे और शरीर पर बड़ी संख्या में छाले पड़ जाते हैं। पूजा करने से ही परेशानी कम हो जाती है। इसलिए गांव में सभी आयु वर्ग के लोग नियमों का पालन करते हैं।
लेकिन अब इस परंपरा को देखते हुए गांव के लोग होली खेलने के लिए दूसरे गांवों में जाने लगे हैं। इस दौरान नवविवाहित लड़कियां घर जाना पसंद करती हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चे भी इसलिए नहीं खेलते क्योंकि उन्हें होली खेलने से डर लगता है।
अन्य गांवों में भी ऐसी ही स्थिति है
जिले का एक अन्य गांव धामनगुड़ी है। यह कोरबा से 20 किमी, जबकि मदवारानी से केवल 5 किमी दूर है। इस गांव में भी पिछले डेढ़ सौ साल से होलिका दहन नहीं हुआ है। इस गांव में एक ऐसा कहना भी है कि होली खेलने से गांव के देवता नाराज हो जाते हैं।
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