भारत कुमार का सफर-जब सिनेमा ने पहना देशभक्ति का रंग

सिनेमा का चमकता सितारा मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। लेकिन उनकी फिल्मों और देशप्रेम की कहानियां हमेशा अमर रहेंगी।चलिए जानते है बॉलीवुड से लेकर उनकी ज़िंदगी के यादगार सफर को। 

3 अप्रैल 2025 की सुबह मुंबई में मनोज कुमार ने आखिरी सांस ली। फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है ।

कौन थे मनोज कुमार

असली नाम - हरिकिशन गिरि गोस्वामी

जन्म - 24 जुलाई 1937, एबटाबाद (अब पाकिस्तान)

देशभक्ति के जज्बे से सराबोर उनकी फिल्में हर भारतीय के दिल में बसी हैं।

फिल्मी सफर की शुरुआत

1957 में ‘फैशन’ से की करियर की शुरुआत, लेकिन पहचान मिली ‘हरियाली और रास्ता’ और ‘वो कौन थी?’ से।

1965 में ‘शहीद’ और 1967 में ‘उपकार’ ने उन्हें देशभक्ति का चेहरा बना दिया।

‘भारत कुमार’ की उपाधि कैसे मिली

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान शास्त्री जी के ‘जय जवान, जय किसान’ नारे से प्रेरित होकर बनाई ‘उपकार’। फिल्म सुपरहिट हुई और दर्शकों ने उन्हें ‘भारत कुमार’ का नाम दे दिया।

मनोज कुमार की सबसे यादगार फिल्में

उपकार (1967) रोटी कपड़ा और मकान (1974)

क्रांति (1981) शहीद (1965)

पूरब और पश्चिम (1970)

सम्मान और विवाद दोनों का हिस्सा रहे

1992 में पद्मश्री से सम्मानित

2015 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड मिला

लेकिन 2007 में ‘ओम शांति ओम’ में उनकी पैरोडी विवादों में आ गई, बाद में शाहरुख खान ने माफी मांगी।

हिंदी सिनेमा के सच्चे नायक को अंतिम श्रद्धांजलि।

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