Parenting Tips: क्या आपका बच्चा भी अकेलेपन में खुद से करता है बात? जानें इसका कारण
अक्सर आपने देखा होगा कुछ बच्चे खुद से ही बात करते रहते हैं या अपने काल्पनिक दोस्त से बात करते हैं। ऐसे में कई बार यह नॉर्मल लगता है, लेकिन इसके पीछे का एक मनोवैज्ञानिक कारण होता है। जी हां, रिसर्च के मुताबिक, 7 साल की उम्र तक 65% बच्चे अपना एक काल्पनिक दोस्त बना लेते हैं, जिससे वे अकेले में बात करते रहते हैं। बता दें कि इसके पीछे एक खास वजह होती है।
बच्चे क्यों करते हैं खुद से बात?
जब बच्चे खुद से बात करने लग जाते हैं या अकेले में ऐसे बात करते हैं, जैसे वे किसी दोस्त से बात कर रहे हैं, तो इसके पीछे एक कारण होता है। इस बारे में वेल्सले कॉलेज की मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर ट्रेसी ग्लीसन ने अपनी एक स्टडी में कहा कि काल्पनिक दोस्त बच्चों के लिए एक सुरक्षित रिश्ता होते हैं। बिना किसी डर के वे उन दोस्तों से अपने मन की सारी बातें कह देते हैं। तो यह उनका एक कंफर्ट जोन होता है।
क्या ये नॉर्मल है?
बच्चों का खुद से बात करना उनका भवनात्मक रूप से मजबूत होना बताता है। हालांकि, डॉ सत्यकांत कहते हैं कि पुराने समय में ऐसा माना जाता था कि ऐसे बच्चे, जो खुद से बात करते हैं और काल्पनिक दोस्त बनाते हैं, वे अकेलेपन का शिकार होते हैं। लेकिन शोध की मानें, तो ऐसा कुछ नहीं है। बल्कि काल्पनिक दोस्ती बच्चों के भावनात्मक रूप से मजबूत होने के बारे मे बताती है। उदाहरण के लिए, बच्चे अगर अपनी जिंदगी में किसी तरह की परेशानी झेलते हैं, तो वे ऐसा काल्पनिक दोस्त बनाते हैं, जो परेशानी से उनकी रक्षा करते हैं।
बता दें कि वैसे तो यह बात काफी नॉर्मल है कि आपका बच्चा किसी काल्पनिक दोस्त से बात कर रहा है, लेकिन उस पर यह ध्यान देना जरूरी है कि वह किस तरह की बातें कर रहा है। अगर पैरेंट्स को कुछ गलत या असामान्य लगता है, तो उन्हें बच्चे को समझाने की जरूरत है। बता दें कि कई बार बच्चे किसी भी चीज को अपना दोस्त बना लेते हैं और उनसे बात करने लग जाते हैं। उदाहरण के मुताबिक, एक बच्ची का दोस्त एक टाइगर था, वहीं एक अन्य बच्चे ने अपने घोड़े वाले खिलौने को ही अपना दोस्त बना लिया था। तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है, यह काफी हद तक उनकी भावनाओं को जाहिर करने का तरीका है, जो सामान्य है।
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