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Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक बना कानून...राष्ट्रपति की मिली मंजूरी

वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। अब यह नया कानून बन गया है।
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Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी मंजूरी दे दी है, अब यह विधेयक कानून बन गया है। (Waqf Amendment Bill) वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवाने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। (Waqf Amendment Bill) अब राष्ट्रपति ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद विधेयक कानून बन गया है। इधर, इस नए कानून का विपक्षी राजनीतिक दल लगातार विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस सहित कुछ अन्य दलों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

वक्फ संशोधन बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी

वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के पास भेजा गया था। अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद यह विधेयक कानून बन गया है। हालांकि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस नए कानून का विरोध कर रहे हैं। AIMIM, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस नए कानून के खिलाफ अदालत पहुंच गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में अलग अलग याचिका दायर कर इस कानून को चुनौती दी गई है।

मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध प्रदर्शन

वक्फ संशोधन बिल का कई मुस्लिम संगठन स्वागत कर चुके हैं। मगर कई मुस्लिम संगठन वक्फ संशोधन बिल का विरोध भी कर रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार साफ तौर पर कह चुकी है कि इस वक्फ के नए कानून से किसी को भी नुकसान नहीं होगा। ना ही यह कानून मुस्लिम विरोधी है। केंद्र सरकार का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक के जरिए वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। इसके साथ ही वक्फ बोर्ड के काम में पारदर्शिता आएगी।

Waqf Amendment Bill

12-12 घंटे बहस के बाद संसद से पारित

वक्फ संशोधन बिल को पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में पेश किया गया था। दोनों ही सदनों में इस विधेयक को लेकर लंबी चर्चा हुई। करीब 12 - 12 घंटे की चर्चा के बाद दोनों ही सदनों से इस विधेयक को पारित करवा लिया गया। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। इसी तरह राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े। राज्यसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए सभी संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई, मगर सभी प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गए। संसद से विधेयक पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया है।

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