Gujrat Fighter Jet Crash: मौत से भी नहीं घबराया जांबाज पायलट... मरते-मरते कैसे बचा लीं कई जिंदगियां ?
Gujrat Jaguar Fighter Jet Crash: भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान गुजरात के जामनगर में दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे में पायलट की भी जान चली गई। (Gujrat Jaguar Fighter Jet Crash) मगर इंडियन एयरफोर्स के इस पायलट ने दुनिया से जाते-जाते कुछ ऐसा किया कि अब हर कोई पायलट की बहादुरी की तारीफ कर रहा है। दिवंगत पायलट सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव का कहना है कि मुझे बेटे पर गर्व है, उसने एक जिंदगी बचाते हुए अपनी जान गंवाई है...
जाते-जाते कई जिंदगियां बचा गए सिद्धार्थ
गुजरात के जामनगर में दो अप्रैल को भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान के पायलट सिद्धार्थ यादव की जान चली गई। मगर इससे पहले पायलट ने कुछ ऐसा किया कि साथी पायलट के साथ कई जिंदगियां बचा लीं। जिसकी वजह से अब हर कोई पायलट की इस बहादुरी की तारीफ कर रहा है। दरअसल, पायलट सिद्धार्थ यादव ने विमान के क्रेश होने से पहले साथी पायलट को इजेक्ट करा दिया। जिसके चलते उनकी जान बच गई, अब वह अस्पताल में भर्ती हैं। इसके साथ ही विमान को घनी आबादी से दूर ले जाकर भी सिद्धार्थ ने बड़ा हादसा होने से बचा लिया।
नाइट मिशन के दौरान क्रेश हुआ विमान
भारतीय वायुसेना का यह जगुआर विमान नाइट मिशन पर था, इसी दौरान यह दुर्घटना का शिकार हो गया। हालांकि पायलट ने तकनीकी खराबी के बीच विमान को घनी आबादी से दूर कर दिया, जिससे एयरफील्ड और स्थानीय आबादी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। मगर दुर्भाग्य से एक पायलट की जान चली गई। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए गए हैं। सिद्धार्थ यादव के पिता का कहना है कि उन्हें कल (2 अप्रैल) रात 11 बजे इस हादसे की जानकारी मिली। सिद्धार्थ के पिता और दादा भी सेना में रह चुके हैं।
पिता बोले- मुझे इकलौते बेटे पर गर्व है
जगुआर हादसे में जान गंवाने वाले वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव के पिता का कहना है कि बेटा मेधावी छात्र था। हमें उस पर हमेशा गर्व रहेगा कि लोगों की जिंदगी बचाते बचाते उसकी जान गई। सिद्धार्थ यादव हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले थे। पिछले सप्ताह 23 मार्च को ही उनकी सगाई हुई थी। सगाई के बाद 31 मार्च को वह जामनगर एयरपोर्ट स्टेशन पहुंचे थे। एक दिन बाद ही नाइट मिशन के दौरान विमान क्रेश होने से उनका निधन हो गया। सिद्धार्थ घर के इकलौते बेटे थे, उनकी एक छोटी बहन है। सिद्धार्थ की पार्थिव देह कल 4 अप्रैल को रेवाड़ी पहुंचेगी, यहां पैतृक गांव भालकी में उनकी पार्थिव देह की अंत्येष्टि की जाएगी।
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