सच का पर्दाफाश! CBI का चौंकाने वाला खुलासा, गैंगरेप नहीं हुआ था, केवल एक पुरुष का DNA मिला!
RG Kar Rape Murder: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। इस मामले में पहले यह माना जा रहा था कि यह गैंगरेप का मामला है, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। (RG Kar Rape Murder) सीबीआई ने कहा कि यह गैंगरेप का मामला नहीं था, बल्कि सिर्फ एक पुरुष का डीएनए पाया गया, जिससे यह साबित हुआ कि केवल एक आरोपी शामिल था। सीबीआई की ओर से दी गई यह जानकारी पीड़िता के माता-पिता द्वारा फिर से जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई।
हाईकोर्ट में गंभीर सवाल...गैंगरेप या अकेले बलात्कार?
यह खुलासा तब हुआ जब कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने जांच एजेंसी से पूछा था कि क्या यह बलात्कार एक व्यक्ति ने किया था या फिर सामूहिक बलात्कार था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि सीबीआई को मामले की केस डायरी को अदालत में पेश करना होगा ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इस अपराध में कितने लोग शामिल थे। इस सवाल के बाद सीबीआई ने जवाब दिया कि केवल एक आरोपी का डीएनए पाया गया है, लेकिन अन्य आरोपियों की संलिप्तता पर जांच चल रही है।
संजय रॉय की दोषसिद्धि ....आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में मुख्य आरोपी, सिविक वॉलंटियर संजय रॉय, पहले ही बलात्कार और हत्या के अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, सीबीआई ने इस बात की पुष्टि की कि वह उन अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच कर रही है जो इस अपराध को छिपाने में शामिल थे। इसका मतलब है कि कोर्ट की निगरानी में अब यह जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या और भी लोग इस जघन्य अपराध में शामिल थे।
मामले की पुन... जांच की मांग
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब पीड़िता के माता-पिता ने मामले की पुनः जांच की याचिका दायर की। उनका कहना था कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ है, और वे चाहते थे कि पूरी जांच फिर से की जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपने सवालों का समाधान पाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया था।
छिपी हुई सच्चाई की जांच जरूरी...
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने मामले की पूरी जानकारी अदालत में पेश की। अब, जांच एजेंसी को यह आदेश दिया गया है कि वह यह स्पष्ट करें कि इस अपराध में केवल एक व्यक्ति था या अधिक। इसके अलावा, अदालत ने संजय रॉय के बाद हुई घटनाओं की जांच का आदेश भी दिया है, ताकि यह पता चल सके कि इस अपराध को छिपाने के प्रयास किए गए थे या नहीं। सीबीआई इस मामले में नए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश कर रही है ताकि न्याय का पूरा रास्ता खोला जा सके।
पीड़िता के परिवार के लिए उम्मीद की किरण
सीबीआई की जांच और कोर्ट के आदेशों के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़िता के परिवार को न्याय मिल सकेगा। हालांकि, इस मामले में अब भी कई सवाल खड़े हैं, लेकिन जांच जारी रहने से यह उम्मीद बनी हुई है कि दोषियों को सजा मिलेगी और मामले में छिपी हुई सच्चाई सामने आएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि अदालत में सही न्याय के लिए सही सवाल उठाना जरूरी है और सीबीआई की जांच में हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है।
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