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भारत की पहली हाइपरलूप ट्रेन टेस्ट ट्रैक तैयार, अब 350 किमी की दूरी सिर्फ 15 मिनट में होगी कवर, रेल मंत्री ने साझा किया वीडियो

हाइपरलूप प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेलवे और IIT मद्रास ने मिलकर पहला 410 मीटर हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक बनाया, अगर सब ठीक रहा तो आने वाले दिनों में बदल जायेगा परिवहन स्वरुप
02:13 PM Dec 06, 2024 IST | Vyom Tiwari
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भारत के साइंस और टेक्नोलॉजी की बात हो, स्पेस की बात हो या फिर डिफेन्स टेक्नोलॉजी हो भारत हर एक क्षेत्र में अपने नए कीर्तिमान दर्ज़ कर रहा है। इसी कड़ी में अब एक नई खबर आई है। अब भारतीय रेल ने देशवासियों को गर्वान्वित होने का मौका दिया है। भारतीय रेल ने अब देश में सबसे पहला हाइपरलूप ट्रेन (Hyperloop Train) टेस्ट ट्रैक तैयार कर लिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी, यह ट्रैक 410 मीटर लंबा है। रेल मंत्री ने इस ट्रैक की एक वीडियो भी शेयर की।

यह टेस्ट ट्रैक थाईयुर में आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी कैंपस में तैयार की गई है। इस ट्रैक को भारतीय रेलवे, आईआईटी-मद्रास की हाइपरलूप टीम और संस्थान में स्थापित स्टार्टअप टीयूटीआर हाइपरलूप ने मिलकर बनाया है।

350km को 15 मिनिट में कर लेंगे कवर 

आईआईटी मद्रास की हाइपरलूप टीम का लक्ष्य है तेज, सस्ता, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सिस्टम तैयार करना। इसके लिए थाईयुर में डिस्कवरी कैंपस पर 410 मीटर लंबा टेस्ट ट्रैक बनाया गया। यहां पहली बार हाइपरलूप ने 100 किमी/घंटा की स्पीड पर काम किया। अब आगे के टेस्ट बड़े ट्रैक पर किए जाएंगे, जहां इसे 600 किमी/घंटा तक की रफ़्तार पर परखा जाएगा।

अगर सब सही रहता है तो हाइपरलूप तकनीक हमारी यात्रा के तरीके को पूरी तरह से बदल सकती है। सोचिए, जहां घंटों लगते थे, वहां अब मिनटों में पहुंचा जा सकेगा। इसे साकार करने के लिए भारतीय रेल मंत्रालय ने 8.34 करोड़ रुपये का फंड दिया है।

इस तकनीक का मुख्य मकसद लंबी दूरी के सफर को बेहद तेज और आसान बनाना है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिये, चेन्नई से बेंगलुरु के बीच करीब 350 किलोमीटर की दूरी को हाइपरलूप से सिर्फ 15 मिनट में पूरा किया जा सकता है। अगर यह प्रोजेक्ट सही दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह शहरों को जोड़ने और विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने में मददगार साबित हो सकता है।

IIT मद्रास की टीम ने किया तैयार

आईआईटी-मद्रास की टीम एक खास प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें हाइपरलूप ट्रेन (Hyperloop Train) के अलग-अलग चरणों को डिजाइन किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 2012 में तब चर्चा में आया जब एलोन मस्क ने इस तकनीक पर रिसर्च को बढ़ावा देने का ऐलान किया था। आईआईटी-मद्रास के इस प्रोजेक्ट में 76 छात्र मेहनत कर रहे हैं। इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 11.5 किलोमीटर ट्रैक को बनाया जाएगा, जहां जरूरी टेस्ट किए जाएंगे। टेस्ट सफल होने के बाद, दूसरे चरण में करीब 100 किलोमीटर का ट्रैक को तैयार किया जाएगा।

1100 किमी प्रति घंटे ही होगी रफ़्तार 

हाइपरलूप ट्रेन एक उन्नत तकनीक से चलने वाली ट्रेन होगी जिसकी टॉप स्पीड लगभग 1100 किमी प्रति घंटे रखने की उम्मीद है, जबकि सिस्टम की परिचालन स्पीड 360 किमी प्रति घंटे या 100 मीटर प्रति सेकंड प्रस्तावित की गई है.

हाइपरलूप एक बहुत ही तेज स्पीड वाली ट्रेन है या आप बहुत तेज़ स्पीड से चलने वाला वहान बोल सकते है जिसमे एक पॉड में बैठकर आप तेज स्पीड में आवाजाही कर सकेंगे। यह पॉड एक बार में लगभग 24-28 लोगों को ले जाने में सक्षम होगा। यह पॉड या ट्रेन सीधे मंजिल पर जाकर ही रुकेगी अभी के जैसी बाकी ट्रेनों की तरह बीच में और किसी स्टेशन पर नहीं रुकेगी।

 

 

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