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रविंदर रैना को पटखनी देने वाले सुरिंदर चौधरी कौन हैं? जिसे उमर अब्दुल्ला ने बनाया अपना डिप्टी

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने हैं, सुरिंदर चौधरी उपमुख्यमंत्री हैं। चौधरी ने बीजेपी को छोड़कर नेशनल कांफ्रेंस में शामिल होकर चुनाव जीता। कांग्रेस समर्थन देगी, लेकिन मंत्रालय नहीं लेगी।
05:57 PM Oct 16, 2024 IST | Vibhav Shukla
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रविंदर रैना को पटखनी देने वाले सुरिंदर चौधरी कौन हैं?

Who is Surinder Kumar Choudhary: जम्मू-कश्मीर में नए नेतृत्व का आगाज़ हो गया है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जो जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहले मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पांच अन्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई। इस नई सरकार में सुरिंदर चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया है, जिन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय जीत हासिल की।

चुनावी जीत का सफर

सुरिंदर चौधरी (Surinder Choudhary Profile) ने जम्मू-कश्मीर की नौशेरा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रमुख नेता रविंदर रैना को हराया। चौधरी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर चुनाव लड़ा और 35,069 वोट प्राप्त किए, जबकि रैना को केवल 27,250 वोट मिले। यह जीत न केवल व्यक्तिगत रूप से चौधरी के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि यह दर्शाती है कि मतदाता बदलाव की चाहत में हैं।

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इस चुनाव ने दिखाया कि लोगों में राजनीतिक विचारधारा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। चौधरी की जीत से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के लोग अब नए नेतृत्व की ओर देख रहे हैं। यह विशेषकर तब महत्वपूर्ण है जब हमने पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

कौन हैं सुरिंदर चौधरी ?

सुरिंदर चौधरी(who is surinder chaudhary) जाट समुदाय से आते हैं और जम्मू-कश्मीर के जाने-माने हिंदू नेताओं में से एक हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से की थी और महबूबा मुफ्ती के करीबी माने जाते थे। लेकिन 2022 में नीतिगत मतभेदों के चलते उन्होंने पीडीपी से अलविदा लेकर बीजेपी जॉइन कर ली। हालांकि, बीजेपी में रहकर भी चौधरी को अपनी राजनीतिक पहचान बनाने में कठिनाई हुई, जिसके कारण उन्होंने एक साल बाद बीजेपी छोड़कर नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का फैसला किया।

चौधरी की शिक्षा की बात करें, तो उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की है। उनका हलफनामा बताता है कि उन्होंने 1987 में जम्मू-कश्मीर राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके पास कुल संपत्ति 2.03 करोड़ रुपये है, जबकि उन पर 56 हजार रुपये का लोन भी है। यह जानकारी उनके चुनावी हलफनामे में उपलब्ध है, जो उनकी पारदर्शिता को दर्शाता है।

शपथग्रहण समारोह की रौनक

उमर अब्दुल्ला और उनकी नई कैबिनेट का शपथग्रहण समारोह एक भव्य आयोजन था। इस समारोह में कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने भाग लिया, जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, सुप्रिया सुले और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव शामिल थे। इन नेताओं की उपस्थिति ने समारोह को और भी महत्वपूर्ण बना दिया।

हालांकि, कांग्रेस ने इस नई सरकार में मंत्रालय में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह उमर अब्दुल्ला की सरकार को बाहर से समर्थन देगी। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने बताया कि कांग्रेस राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही है, जिसके लिए पार्टी केंद्र सरकार से लगातार संवाद कर रही है।

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए थे विधानसभा चुनाव

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा और 90 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं। बीजेपी ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। यह चुनाव परिणाम संकेत देता है कि क्षेत्र में राजनीतिक परिवर्तन की लहर चल रही है, जो आगे आने वाले समय में नई चुनौतियों और अवसरों को जन्म देगी।

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इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की नई सरकार के गठन से एक नई उम्मीद भी जगी है। उमर अब्दुल्ला और उनकी टीम को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी सरकार कैसे समस्याओं का समाधान करती है और क्षेत्र के विकास के लिए कौन सी नई योजनाएँ लाती है। राजनीतिक स्थिरता और विकास की दिशा में यह नया नेतृत्व कितना सफल होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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