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'वक्फ' क्या है और नया Waqf Bill बन गया कानून तो किसे होगा फायदा? जानिए कानून की पूरी ABCD

आज लोकसभा में पेश वक्फ बिल में अहम बदलाव हुए हैं। जानिए, इसका वक्फ संपत्तियों पर असर, सरकार की रणनीति और बिल पास होने की संभावनाएँ।
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वक्फ बिल का नया स्वरूप आज 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में पेश होने जा रहा है। अगर ये बिल संसद से पास हो गया, तो ये कानून बन जाएगा और वक्फ संपत्तियों के नियमों में बड़ा बदलाव आएगा। लेकिन इसको पास कराने के लिए सरकार के पास जरूरी नंबर होना आवश्यक है। अगर NDA के सहयोगी इधर उधर पलटी मार गए तो समझो बिल खटाई में पड़ सकता है। वहीं JPC की मंजूरी के बाद बिल में कई संशोधन भी हुए हैं, जिनसे विवाद भी खड़ा हुआ है। बता दें कि इस बिल को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो इसे साफ़ तौर पर समझ नहीं पाए हैं। इस रिपोर्ट में हम उन्हीं सभी सवालों और बारीकियों जैसे वक्फ' क्या है? इस बिल से किसे फायदा होगा और क्या मस्जिदों-दरगाहों पर असर पड़ेगा? को समझने का प्रयास करेंगे।

वक्फ का मतलब क्या होता है?

'वक्फ' शब्द अरबी के 'वकुफा' से आया है, जिसका मतलब है 'रोकना'। इस्लाम में जब कोई अपनी संपत्ति - जैसे जमीन, घर, या पैसे - धार्मिक या समाज कल्याण के लिए दान करता है, तो उसे वक्फ कहते हैं। इसे 'अल्लाह की संपत्ति' माना जाता है, जिसे बेचा या गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दान देने वाला 'वकिफा' कहलाता है। पैगंबर मोहम्मद के समय 600 खजूर के पेड़ों का बाग पहला वक्फ था, जिसकी कमाई गरीबों के लिए थी। भारत में ये परंपरा 12वीं सदी से दिल्ली सल्तनत के समय से चली आ रही है। आजादी के बाद 1954 में पहला वक्फ एक्ट बना, फिर 1995 और 2013 में संशोधन हुए।

नए वक्फ बिल में क्या होंगे बदलाव?

नया वक्फ बिल कई अहम बदलाव लेकर आया है। अब सिर्फ वही शख्स संपत्ति वक्फ कर सकेगा, जो 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो। अगर दान से जुड़ा कोई विवाद हुआ, तो जांच के बाद ही फैसला होगा। वक्फ बोर्ड में अब 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी, और पदेन सदस्यों को इस गिनती से अलग रखा जाएगा। राज्य सरकारों को वक्फ संपत्ति के झगड़ों में ज्यादा अधिकार मिलेंगे। पुरानी मस्जिदों या दरगाहों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये बदलाव सहयोगी दलों की मांग और पुराने कानून की खामियों को ठीक करने के लिए किए गए हैं। 8 अगस्त 2024 को बिल पेश हुआ, विरोध के बाद जेपीसी ने 14 संशोधनों को मंजूरी दी और अब ये संसद में है।

संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?

बता दें कि 2022 से अब तक देश भर के हाईकोर्ट में वक्फ से जुड़ी 120 याचिकाएं दायर हुईं। इनमें मौजूदा कानून की खामियां गिनाई गईं, खासकर सेक्शन 40, जो वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को अपनी घोषित करने की ताकत देता है। इसके खिलाफ शिकायत सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल में हो सकती है, और उसका फैसला अंतिम होता है। आम लोगों के लिए इसे कोर्ट में चुनौती देना मुश्किल है। मुस्लिम समुदाय की 15 याचिकाओं में भी यही शिकायत थी। दूसरी मांगें थीं - सभी अल्पसंख्यकों के लिए एक ट्रस्ट कानून, ट्रिब्यूनल खत्म कर सिविल कोर्ट से फैसला, भ्रष्टाचार पर सजा, और शिया-महिलाओं को हिस्सेदारी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव 2006 की सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर आधारित हैं।

Waqf बिल से किसे फायदा, किसे नुकसान?

अगर ये बिल कानून बना, तो कई पक्षों को असर होगा। मुस्लिम महिलाएं और पिछड़े वर्ग वक्फ बोर्ड में हिस्सेदारी पाकर मजबूत होंगे। राज्य सरकारें संपत्ति विवाद सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। आम लोगों को अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार से राहत मिल सकती है, क्योंकि कोर्ट में अपील आसान होगी। वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों से पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन कुछ मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक स्वायत्तता पर हमला मानते हैं। उनका तर्क है कि गैर-मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी से वक्फ की मूल भावना कमजोर होगी। किरेन रिजिजू कहते हैं कि ये बिल भ्रष्टाचार रोकेगा और 6 महीने में बिना धार्मिक दखल के विवाद सुलझाएगा।

बिल पास होगा या अटकेगा? जानें नंबर गेम

दरअसल बिल को पास होने के लिए लोकसभा में 543 में से 272 और राज्यसभा में 236 में से 119 वोट चाहिए। बता दें कि लोकसभा में BJP के 240 सांसद हैं जबकि NDA के पास कुल 282 (टीडीपी-16, जदयू-12, शिवसेना-7, लोजपा-5 आदि)। इस हिसाब से सरकार के पक्ष में बहुमत मिलना आसान लगता है, पर NDA के सहयोगियों का कुछ पता नहीं कौन कब पलटी मार जाए। राज्यसभा में बीजेपी के 96, NDA के 19, कुल 115 सांसद हैं। 6 नॉमिनेटेड सांसदों का समर्थन चाहिए। आज लोकसभा में 8 घंटे की बहस और वोटिंग से फैसला होगा। अगर सहयोगी साथ रहे, तो बिल को कानून बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती, वरना यह नया बिल खटाई में भी पड़ सकता है।

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