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वक्फ बिल पर तमिलनाडु में सियासी भूचाल, विधानसभा में पास हुआ प्रस्ताव...CM स्टालिन ने दिया बड़ा बयान!

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद छिड़ गया है। राज्य विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन ...
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Tamil Nadu Assembly : तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद छिड़ गया है। राज्य विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को लेकर जहां डीएमके सरकार इसे मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के तौर पर देख रही है, वहीं बीजेपी और एआईएडीएमके ने इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया है। इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे तमिलनाडु की विधानसभा एक बार फिर राजनीतिक अखाड़ा बन गई है।

तमिलनाडु विधानसभा में पारित इस प्रस्ताव पर (Tamil Nadu Assembly ) मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि "यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।" वहीं, भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। दूसरी ओर, विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके ने भी डीएमके सरकार पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।

अब इस मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र सरकार के विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित करना एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति है या वाकई में मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम?

क्या बोले सीएम एमके स्टालिन?

विधानसभा में वक्फ बिल के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा..."केंद्र सरकार वक्फ विधेयक में संशोधन कर वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश कर रही है। इससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी, जो भारत के संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है।" सीएम स्टालिन ने आगे कहा कि तमिलनाडु हमेशा से धार्मिक सद्भाव का केंद्र रहा है, और इस तरह के विधेयक से सामाजिक तानाबाना बिगड़ सकता है।

प्रस्ताव में क्या कहा गया?

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया..."भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक 2024 अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। विधानसभा केंद्र सरकार से अपील करती है कि इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए।"

AIADMK ने DMK सरकार पर साधा निशाना

तमिलनाडु सरकार द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद विपक्षी पार्टी AIADMK ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। AIADMK के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा..."ऐसा लगता है कि DMK सरकार धर्म और भाषा के आधार पर राजनीति करने में लगी हुई है। अगर DMK को वक्फ विधेयक से समस्या है, तो उनके सांसदों ने इस पर संसद में आपत्ति क्यों नहीं जताई? विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सिर्फ वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।" AIADMK ने DMK पर मुस्लिम समुदाय को उकसाने का आरोप लगाया और कहा कि यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है।

भाजपा ने भी किया विरोध

तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा की विधायक वनथी श्रीनिवासन ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया और कहा..."DMK सरकार धार्मिक भेदभाव की राजनीति कर रही है। केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह विधेयक लाया है, लेकिन DMK इसे राजनीतिक रंग देने में लगी है।" भाजपा ने DMK सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास है।

सरकार क्यों लाई है वक्फ संशोधन विधेयक?

केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करने के उद्देश्य से पेश किया है। सरकार का कहना है कि...वक्फ बोर्डों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह संशोधन जरूरी है। वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डेटाबेस में लाने की योजना है। किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने से पहले कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस की आवश्यकता होगी। महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संशोधन किया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है और अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों पर प्रभाव डाल सकता है।

क्या यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति में गूंजेगा?

तमिलनाडु विधानसभा में पारित इस प्रस्ताव ने राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। AIADMK और भाजपा इसे DMK की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति बता रही हैं, वहीं DMK का कहना है कि विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है।

अब सवाल यह है कि...क्या यह मुद्दा संसद में भी उठेगा?क्या अन्य राज्यों की विधानसभा भी इस प्रस्ताव का समर्थन करेंगी? क्या केंद्र सरकार इस विधेयक में संशोधन करेगी? फिलहाल, तमिलनाडु में वक्फ बिल को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है, और इसका असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।

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