पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, संसद में गरमाया मुद्दा, एस. जयशंकर और शशि थरूर आमने-सामने, जानें क्या है मामला
S. Jaishankar: भारतीय राजनीति में विचारों का टकराव आम बात है, लेकिन जब राष्ट्रीय हित और कूटनीतिक मामलों की बात आती है, तो कई बार विरोधी भी एकमत नजर आते हैं। ऐसा ही नज़ारा संसद में देखने को मिला, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर तीखा बयान दिया। (S. Jaishankar) दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भी जयशंकर की बात का समर्थन किया और इसे पूरी तरह "तथ्यात्मक" करार दिया। हालांकि, इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार को एक खास सलाह भी दे डाली, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
जयशंकर की तीखी टिप्पणी पर शशि थरूर की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने संसद में स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही घटनाओं पर पैनी नजर बनाए हुए है। इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सहमति जताई और इसे 'बेहद गंभीर' मसला बताया।
भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की कमी...
थरूर ने इस मुद्दे पर सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि भारत अपनी चिंता सीधे तौर पर पाकिस्तान तक नहीं पहुंचा पा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक संवाद नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, "अगर भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत होती, तो हम अपनी चिंता सीधे जता सकते थे और समाधान की मांग कर सकते थे।" जयशंकर ने संसद को जानकारी दी कि हाल ही में पाकिस्तान में सिख समुदाय पर तीन बड़े हमले हुए। एक मामले में सिख परिवार पर हमला किया गया, दूसरे में एक गुरुद्वारा खोलने पर धमकी दी गई, और तीसरे मामले में एक लड़की का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण किया गया।
अहमदिया...ईसाई समुदाय भी निशाने पर
इसके अलावा, जयशंकर ने अहमदिया समुदाय के खिलाफ दो घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें एक मस्जिद को सील कर दिया गया और 40 कब्रों को नष्ट कर दिया गया। वहीं, ईसाई समुदाय से जुड़े एक मामले में, एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया और उसे कड़ी सजा दी गई। थरूर ने सरकार से आग्रह किया कि भारत को इस मसले पर और प्रभावी तरीके से कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति ‘बेहद चिंताजनक’ है और भारत को इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाना चाहिए।
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