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तमिलनाडु, बंगाल और बिहार चुनावों पर भाजपा का फोकस, विधानसभा चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरु

अमित शाह, जो पिछले एक दशक से बीजेपी की चुनावी रणनीतियों के मास्टरमाइंड रहे हैं, इन राज्यों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हर महीने कम से कम दो दिन का दौरा करेंगे।
01:49 PM Apr 04, 2025 IST | Sunil Sharma

2024-25 के चुनावों को लेकर बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति ने पार्टी को एक नया जोश दिया है। अगले कुछ महीनों में बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। इन चुनावों में बीजेपी की रणनीति का केंद्र मुख्य रूप से तीन राज्यों - बिहार, बंगाल और तमिलनाडु पर होगा। अमित शाह, जो पिछले एक दशक से बीजेपी की चुनावी रणनीतियों के मास्टरमाइंड रहे हैं, इन राज्यों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हर महीने कम से कम दो दिन का दौरा करेंगे। उनके इस दौरे का पहला चरण अप्रैल में होगा, जिसमें वह 14-15 अप्रैल को तमिलनाडु और 30 अप्रैल को बिहार का दौरा करेंगे।

तमिलनाडु में जातीय समीकरण को साधने की कोशिश

तमिलनाडु की सियासत में बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पार्टी इस बार विधानसभा चुनावों में एक नया रुख अपनाने की योजना बना रही है। हाल ही में, अमित शाह ने तमिलनाडु में अन्‍नाडीएमके के जनरल सेक्रेटरी पलानीस्‍वामी से मुलाकात की। यह मुलाकात बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी यहां जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। खबरें हैं कि बीजेपी के तमिलनाडु अध्यक्ष अन्‍नामलाई को पद छोड़ने के लिए कहा जा सकता है, ताकि उनकी जगह थेवर जाति के विधायक नागेंद्रन को पार्टी का नेतृत्व सौंपा जा सके। इस कदम से बीजेपी उम्मीद कर रही है कि वह तमिलनाडु में जातीय समीकरणों को ठीक से साध सकेगी और अन्‍नाडीएमके से फिर से गठबंधन कर सकेगी।

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देगी बीजेपी 

बंगाल में बीजेपी की रणनीति और भी चुनौतीपूर्ण होगी। बीजेपी ने हाल ही में राज्य में 77 सीटों के साथ विपक्षी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। अमित शाह की योजना 2026 में बंगाल को बीजेपी के कब्जे में लाने की है। इसके लिए पार्टी ने अपनी रणनीतियों को आकार देना शुरू कर दिया है, और इसके लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी बंगाल का एक हफ्ते का दौरा किया था। बीजेपी अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है और राज्य में अपनी स्थिति और ताकत को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

बिहार और असम में बीजेपी को है जीत की उम्मीद

बिहार में बीजेपी का जोर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से है। पार्टी का उद्देश्य राज्य में तीसरी बार सत्ता हासिल करना है। असम में भी बीजेपी की स्थिति मजबूत है और पार्टी उम्मीद कर रही है कि वहां एक बार फिर कमल खिलेगा। फिलहाल जहां असम में भाजपा के सामने कोई मजबूत प्रतिद्वंदी नहीं है वहीं दूसरी ओर बिहार में महागठबंधन से कड़ी टक्कर मिल सकती है।

केरल में विचारधारा की लड़ाई तो पुडुचेरी में जाति समीकरणों के सहारे

केरल में बीजेपी के लिए चुनौती और भी बढ़ी हुई है, क्योंकि यहां विचारधारा की लड़ाई सियासी मैदान पर तेज़ है। लेफ्ट सरकार के खिलाफ बीजेपी अपनी उपस्थिति को और बढ़ाना चाहती है और यहां भी चुनावी बिसात बिछाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पुडुचेरी की राजनीति भी बड़े पैमाने पर तमिलनाडु के प्रभाव में रहती है। वहां भी बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तमिलनाडु की सियासी रणनीति का पालन करने की कोशिश करेगी।

कुल मिलाकर, बीजेपी आगामी छह चुनावी राज्यों में अपनी रणनीतियों पर काम कर रही है, और इस बार उसका फोकस मुख्य रूप से बिहार, बंगाल और तमिलनाडु पर रहेगा। अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी इन राज्यों में सियासी समीकरणों को साधने की पुरजोर कोशिश करेगी और अपने सहयोगियों से गठबंधन करने के लिए काम करेगी। इन चुनावों में बीजेपी का लक्ष्य अपने राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करना है।

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