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जब पेजर उड़ाए जा सकते हैं तो EVM क्यों नहीं हो सकती हैक? चुनाव आयोग ने दिया जवाब

चुनाव आयोग ने EVM की सुरक्षा पर सवाल उठाने वालों को यह आश्वस्त किया है कि मशीनों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं है और हर शिकायत का जवाब दिया जाएगा।
07:45 PM Oct 15, 2024 IST | Vibhav Shukla
जब पेजर को उड़ा सकते हैं तो EVM हैक क्यों नहीं हो सकती?

 Pager vs EVM:  चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को 288 सीटों के लिए मतदान होगा, जबकि झारखंड में चुनाव दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को होंगे। दोनों राज्यों के नतीजे एक साथ 23 नवंबर को आएंगे।

चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से जुड़े सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि हरियाणा चुनाव में आई शिकायतों का पूरा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि EVM की जांच कई स्तरों पर होती है, जो कि चुनाव से पहले सुनिश्चित की जाती है।

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ईवीएम की कमिशनिंग के दौरान, बैटरी लगाई जाती है और चुनाव चिह्न डालने का काम वोटिंग से 5-6 दिन पहले होता है। उन्होंने बताया कि बैटरी पर भी एजेंट के हस्ताक्षर होते हैं, जिससे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है। EVM को जहां रखा जाता है, वहां तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था होती है।

पेजर बनाम EVM: मुख्य चुनाव आयुक्त ने दिया स्पष्टीकरण

मुख्य चुनाव आयुक्त ने पेजर हैकिंग की चर्चाओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेजर कनेक्टेड होता है, जबकि EVM पूरी तरह से ऑटोनोमस होती है। उन्होंने कहा, "जब लोग यह कहते हैं कि पेजर को उड़ाया जा सकता है, तो EVM क्यों नहीं हैक की जा सकती, तो उन्हें समझना चाहिए कि EVM की सुरक्षा स्तर पर है, जो कि पेजर से बहुत अधिक है।" उनका कहना था कि EVM की जांच इतनी विस्तृत होती है कि उसमें गड़बड़ी का कोई मौका नहीं होता।

ईवीएम की सुरक्षा प्रक्रिया

राजीव कुमार ने बताया कि मतदान के लिए जब EVM पोलिंग बूथ पर जाती है, तो प्रक्रिया को फिर से दोहराया जाता है। मशीनों की वीडियोग्राफी भी की जाती है ताकि हर प्रक्रिया का रिकार्ड रखा जा सके। यह सुनिश्चित किया जाता है कि किस नंबर की मशीन किस बूथ पर जाएगी और इस जानकारी का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। पोलिंग एजेंट्स को मशीन में वोट डालकर दिखाने का भी प्रावधान है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो।

सुरक्षा का डबल लॉक सिस्टम

चुनाव आयुक्त ने यह भी बताया कि EVM को कमिशनिंग के बाद एक मजबूत कमरे में रखा जाता है, जहां उसे डबल लॉक किया जाता है। तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था EVM की सुरक्षा को और मजबूत बनाती है। इसके अलावा, EVM की बैटरी को भी सिंगल यूज कैलकुलेटर जैसी बैटरी के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिससे उसकी सुरक्षा और भी बढ़ जाती है।

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चुनाव आयोग ने EVM के प्रति उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है, आयोग ने कई सुरक्षा उपायों को लागू किया है। आयोग का कहना है कि EVM की सुरक्षा में कोई कमी नहीं है और हर शिकायत का उत्तर दिया जाएगा।

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