Waqf Bill News: वक्फ का दुरुपयोग न हो इसलिए बिल जरूरी - जेपी नड्डा
Waqf Bill News: वक्फ संशोधन विधेयक पर गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा हुई। इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार यह विधेयक क्यों लेकर आई। उन्होंने मुसलमान देशों का नाम लेकर समझाया कि वक्फ की संपत्ति को लेकर यह बिल लाना कितना जरूरी था? जेपी नड्डा ने कहा कि इस बिल पर कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। सदन में बिल पर समर्थन मिलने की उम्मीद है। लोकतांत्रिक तरीके से बिल लाया गया। जेपीसी में बिल पर पहले काफी चर्चा हुई और 36 बैठकें हुईं। उन्होंने इस बिल को देश हित में बताया।
70 साल तक मुसलमानों को डराकर रखा
विपक्ष द्वारा वक्फ बिल पर किए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए नड्डा ने पूछा, "क्या वक्फ की संपत्ति का प्रॉपर मैनेजमेंट नहीं होना चाहिए? क्या जवाबदेही नहीं होनी चाहिए? हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चलती है। मैं जानना चाहता हूं कि पिछले 70 सालों में किन लोगों ने उन्हें (मुसलमानों को) अलग रखा? किन्होंने उनको डराकर रखा है? नड्डा ने कहा कि वक्फ की संपत्ति का जिम्मेदार तरीके से प्रबंधन होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "तुर्की, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे मुसलमान देशों में वक्फ की संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में लेकर मैनेज कर रही है तो कोई तकलीफ नहीं हो रही है। यहां तो हम भी नहीं कर रहे हैं। यहां वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद और वक्फ ट्रिब्यूनल ही चलाएगा। हम तो सिर्फ उनको नियम के अनुसार लाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे जवाबदेह हो सकें।"
वक्फ का दुरुपयोग न हो इसलिए बिल जरूरी
नड्डा ने कहा कि हमारा प्रयास यही है कि अधिक से अधिक वक्फ की संपत्ति का मुस्लिम समुदाय के हित में इस्तेमाल हो सके। उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य पर वक्फ की आमदनी खर्च होनी चाहिए। संपत्ति सही हाथों में रहे। साल 2013 में कांग्रेस की सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए गए संशोधन का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने बताया कि सरकार को क्यों वक्फ बिल लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि हां, 2013 में हम साथ थे। 2020-21 में हमें ध्यान में आया कि 1913 से लेकर 2013 तक वक्फ की जमीन 18 लाख हेक्टेयर थी। 2013 से 2025 में नई भूमि 21 लाख हेक्टेयर जुड़ गई। इसका दुरुपयोग न हो। इसलिए हमने यह तय किया कि बिल लाकर 2013 में जो चीजें हुईं उसमें परिवर्तन करें।
उन्होंने कहा कि मैं धार्मिक विषयों को छेड़ना नहीं चाहता। असुविधाजनक बात नहीं कहना चाहता, लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि देने वाला असली तो होना चाहिए। उसकी असलियत देखने के लिए एक पैमाना यह है कि वह इस्लाम का पालन करने वाला होना चाहिए। हमने तो CCTV कैमरा लगाया नहीं है। वह बोलेगा कि इस्लाम मानते हैं, नमाज पढ़ते हैं, अच्छी बात है।
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