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वक्फ बिल आज संसद में होगा पेश, जानिए क्या है इस विधेयक की 11 महत्वपूर्ण बातें

आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश होगा। इसमें पारदर्शिता बढ़ाने, संपत्ति दान पर नई शर्तें और वक्फ बोर्ड के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं।
10:45 AM Apr 02, 2025 IST | Vyom Tiwari

Waqf Amendment bill 2024: देश की संसद में आज वक्फ बिल पेश होने जा रहा है जिसमे अब बीजेपी को अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। इसमें बिहार NDA के सदस्य नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जीतनराम मांझी ने इस बिल के लिए बीजेपी को समर्थन देने की बात कही है। इसके साथ ही NDA के अन्य सदस्य जैसे TDP भी इस बिल के समर्थन में सरकार के साथ खड़ी है।

वक्फ विधेयक में कई अहम संशोधन किए गए हैं. ये बदलाव जेपीसी की सिफारिश के आधार पर किए गए हैं. साथ ही सहयोगी दलों जेडीयू और टीडीपी की ओर से भी कुछ सुझाव दिए गए थे जिसे संशोधनों को भी स्वीकार कर लिया गया है। वक़्फ़ बिल में किये गए संशोधन को लेकर पूरे देश में हल्ला मचा हुआ है और ये बदलाव क्या है इसके बारे आपको जरूर पता होना चाहिए

बिल के 11 बड़े बदलाव क्या है?

1.  जिन लोगों ने हाल ही में धर्म परिवर्तन करके इस्लाम धर्म को अपनाया है और जिन्हें मुसलमान बने 5 साल पूरे नहीं हुए हैं वो वफ बोर्ड को अपनी संपत्ति अब दान में नहीं दे पाएंगे।

2.  कोई भी व्यक्ति उसी जमीन को दान में दे पाएगा जो उसके नाम पर रजिस्टर्ड होगी अगर कोई व्यक्ति किसी और के नाम पर रजिस्टर्ड जमीन को दान में देता है तो इसे गैरकानूनी माना जाएगा और वफ भी ऐसी संपत्तियों पर अब अपना दावा नहीं कर पाएगा।

3. वफ में दी गई हर जमीन का ऑनलाइन पोर्टल पर डेटाबेस होगा और वफ बोर्ड इन संपत्तियों के बारे में कोई भी जानकारी अब किसी से छिपा नहीं पाएगा। अब हर कोई कभी भी वक़्फ़ की प्रॉपर्टीज को ऑनलाइन देख पायेगा। किस जमीन को किस व्यक्ति ने दान में दिया है वह जमीन उसके पास कहां से आई वफ बोर्ड को उससे कितने पैसे की आमदनी हुई और उस संपत्ति की देखरेख करने वाले को कितनी तनख्वाह मिलती है यह जानकारी सारी जानकारियां ऑनलाइन पोर्टल पर अब उपलब्ध करानी होंगी और इससे वफ की संपत्तियों में पारदर्शिता आएगी

4. केंद्रीय वफ परिषद में दो गैर मुस्लिम व्यक्ति और दो मुस्लिम महिलाओं को भी अब जगह दी जाएगी इसके अलावा इस परिषद में नियुक्त किए गए सांसद और पूर्व जजों का भी मुस्लिम होना अब अनिवार्य और आवश्यक नहीं होगा यानी अब इस बोर्ड को सेुलर बनाया जा रहा है

5. वफ में पिछड़े और गरीब मुसलमानों को भी जगह मिलेगी और वफ में मुस्लिम महिलाओं को भी अब उनकी हिस्सेदारी मिलेगी राज्यों के वफ बोर्ड में भी अब दो मुस्लिम महिलाएं और दो गैर मुस्लिम सदस्य जरूर रखे जाएंगे और शिया सुन्नी और पिछड़े मुसलमानों से भी एक-एक सदस्य को इसमें रखना अनिवार्य होगा, इनमें बोहरा और आगाखानी समुदाय से भी एक-एक सदस्य होना चाहिए।

6. सरकार अब इन अलग समुदायों के लिए अलग अलग वक़्फ़ बोर्ड बनाने का प्रावधान ला रही है।

7. वक्फ बोर्ड के सीईओ पद के लिए मुस्लिम अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य थी। संशोधन के बाद, अब सीईओ के लिए मुस्लिम होने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे योग्य अधिकारियों की व्यापक चयन प्रक्रिया संभव होगी।

8. वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा किया जाता था। संशोधन के बाद, यह जिम्मेदारी अब जिला कलेक्टर को सौंपी गई है, जिससे सर्वेक्षण प्रक्रिया में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

9. वक़्फ़ बिना किसी दस्तावेज के बिना किसी प्रमाण के अब किसी भी जमीन को अपना नहीं बता पायेगा, अभी तक वक़्फ़ किसी भी जमीन पर अपना दवा ठोक देता था और बिना जांच के ही उसको सही मान लिया जाता था और जिसकी जमीन पर वो दावा करता था उसको ये साबित करना होता था की वो उसकी जमीन है। लेकिन अब पहले वक़्फ़ को साबित करना होगा की उसकी जमीन है।

10. पहले वक़्फ़ से जुड़े मुद्दों की सुनवाई केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में ही होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा किसी व्यक्ति को अगर वक्फ के निर्णय से आपत्ति है तो वो रेवेनुए, सिविल और हाईकोर्ट तक अपील कर सकता है। उसको ये अपील 90 दिनों के भीतर करनी होगी।

11. केंद्र और राज्य सरकारों के पास वक्फ बोर्ड के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार होगा जिससे किसी की तरह की बेईमानी और भ्रस्टाचार को रोका जा सकेगा।  अभी तक वक़्फ़ बोर्ड क्या करता है कहाँ से पैसे लाता है इसका कोई देख रेख करने वाला नहीं था। इसके साथ ही वक्फ अब सरकार को कोई भी जानकारी देने से इंकार नहीं कर सकता।

आज दोपहर 12 बजे पेश होगा बिल 

वक्फ संशोधन बिल को लेकर अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। यह बिल 2 अप्रैल को दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस पर सहमति बन गई है। बीजेपी, जो एनडीए सरकार की अगुवाई कर रही है, अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर सदन में उपस्थित रहने का निर्देश देगी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया गया है। अगर जरूरत पड़ी, तो सदन की सहमति से यह समय बढ़ाया भी जा सकता है।

 

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