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वक्फ बिल क्या है? क्यों मचा है इतना हंगामा? आसान भाषा में समझिए सब कुछ

'वक्फ बिल 2024 क्या है? क्यों मचा है हंगामा? सरकार और विपक्ष के तर्क, संसद का नंबर गेम और कोर्ट की तैयारी - सब कुछ आसान हिंदी में जानें!'
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देश में इन दिनों वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। संसद से सड़क तक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक मामलों में दखल करार दे रहे हैं। आज का दिन इस बिल के लिए अहम है क्योंकि केंद्र सरकार इसे लोकसभा में पेश करने जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वक्फ बिल है क्या? इसका विरोध क्यों हो रहा है और क्या यह पास हो पाएगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।

वक्फ बिल क्या है?

वक्फ (संशोधन) बिल 2024 एक ऐसा कानून है जो 1995 के वक्फ अधिनियम में बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद वक्फ की संपत्तियों को बेहतर तरीके से मैनेज करना, पारदर्शिता लाना और गड़बड़ियों को रोकना है।

वक्फ का मतलब क्या होता है?

पहले ये समझ लीजिए कि वक्फ आखिर है क्या। वक्फ एक इस्लामिक परंपरा है, जिसमें कोई शख्स अपनी जमीन, जायदाद या पैसा धर्म, गरीबों की मदद या समाज के भले के लिए दान कर देता है। ये संपत्ति फिर हमेशा के लिए वक्फ की हो जाती है, जिसे कोई बेच नहीं सकता। देश में वक्फ बोर्ड इसकी देखरेख करते हैं। भारत में करीब 9.4 लाख एकड़ जमीन वक्फ की है, जिसकी कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जाती है। यानी सेना और रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक है।

वक्फ बिल में क्या बदलाव लाए जा रहे हैं?

अब आते हैं इस बिल की असली बात पर। सरकार इसमें कुछ बड़े बदलाव लाना चाहती है, जो इस तरह हैं: गैर-मुस्लिम और महिलाओं को बोर्ड में जगह: अभी तक वक्फ बोर्ड में ज्यादातर मुस्लिम पुरुष ही होते थे। नए बिल में गैर-मुस्लिम और महिलाओं को भी शामिल करने का नियम है। कम से कम दो गैर-मुस्लिम और दो महिलाएं बोर्ड में होंगी।

कलेक्टर को सर्वे का अधिकार: पहले वक्फ बोर्ड खुद तय करता था कि कौन सी संपत्ति उसकी है। अब कलेक्टर को ये पावर दी जा रही है कि वो जांच करे और फैसला ले कि कोई जमीन वक्फ की है या नहीं।

हाईकोर्ट में अपील का रास्ता: पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला फाइनल होता था। अब अगर कोई फैसले से खुश नहीं है, तो 90 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकता है।

संपत्ति का रजिस्ट्रेशन जरूरी: वक्फ की हर संपत्ति को कलेक्टर के दफ्तर में रजिस्टर करना होगा। साथ ही, सारी डिटेल्स एक केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।

ऑडिट में पारदर्शिता: सरकार अब CAG (कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) के जरिए वक्फ की संपत्तियों का ऑडिट करवा सकेगी।
ये बदलाव सुनने में तो ठीक लगते हैं, लेकिन इनसे ही सारा बवाल मचा हुआ है।

विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का विरोध क्यों?

विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन, खासकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), इस बिल को लेकर भड़के हुए हैं। उनका कहना है:

धर्म में दखल: इनका मानना है कि ये बिल मुस्लिमों की धार्मिक आजादी पर हमला है। वक्फ एक धार्मिक ट्रस्ट है, और इसमें गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उनके अधिकारों पर चोट है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी तो इसे "मुसलमानों को उनके धर्म से दूर करने की साजिश" तक कह चुके हैं।

संपत्ति छिनने का डर: इनका आरोप है कि कलेक्टर को पावर देने से सरकार वक्फ की जमीन पर कब्जा कर सकती है। कई लोग कहते हैं कि मस्जिदें, मदरसे और कब्रिस्तान तक खतरे में पड़ सकते हैं।

संविधान का उल्लंघन: कांग्रेस और सपा जैसे दल इसे संविधान के खिलाफ बताते हैं। इनका कहना है कि ये बिल धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और समानता (अनुच्छेद 14) के अधिकारों को ठेस पहुंचाता है।

सरकारी हस्तक्षेप: AIMPLB का तर्क है कि वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। सरकार का कंट्रोल बढ़ेगा, जो मुस्लिम समुदाय के लिए ठीक नहीं है।
विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे रोकने के लिए सड़क से लेकर संसद तक मोर्चा खोल रखा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो चुके हैं, और अब इसे कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है।

सरकार क्या कहती है?

दूसरी तरफ, सरकार और बीजेपी का अपना तर्क है। उनका कहना है कि ये बिल कोई साजिश नहीं, बल्कि सुधार की कोशिश है। सरकार के मुख्य दावे:

पारदर्शिता लाना: सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियां बहुत हैं। कुछ लोग वक्फ की जमीन को लीज पर लेकर या बेचकर मोटा पैसा कमा रहे हैं। नए नियमों से ये रुकेगा।

महिलाओं और गरीबों का भला: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू कहते हैं कि ये बिल मुस्लिम महिलाओं, गरीबों और बच्चों के हक के लिए है। बोर्ड में महिलाओं को जगह मिलेगी, और संपत्ति का सही इस्तेमाल होगा।

माफिया पर लगाम: सरकार का दावा है कि वक्फ बोर्ड पर कुछ ताकतवर लोगों का कब्जा है। नए नियमों से ये "माफिया" खत्म होगा।

संविधान के दायरे में: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि ये बिल संविधान के खिलाफ नहीं है। ये सिर्फ वक्फ को मजबूत करने की कोशिश है, न कि इसे कमजोर करने की।
सरकार का मानना है कि विपक्ष इसे गलत तरीके से पेश कर मुसलमानों को भड़का रहा है।

संसद में पास होगा या नहीं? नंबर गेम क्या कहता है?

अब सवाल ये है कि क्या ये बिल आज लोकसभा में पास हो पाएगा? और राज्यसभा में इसकी राह कैसी होगी? चलिए संसद का गणित देखते हैं:
लोकसभा: यहां कुल 543 सीटें हैं। बहुमत के लिए 272 सांसद चाहिए। एनडीए के पास 293 सांसद हैं, यानी बहुमत से 21 ज्यादा। बीजेपी के पास अकेले 240 सांसद हैं, और बाकी सहयोगी दलों (टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना, एलजेपी) से आते हैं। विपक्षी इंडिया ब्लॉक के पास 233 सांसद हैं। मतलब, लोकसभा में बिल पास होने में कोई दिक्कत नहीं दिखती।

राज्यसभा: यहां अभी 236 सांसद हैं। बहुमत के लिए 118 चाहिए। एनडीए के पास 119 सांसद हैं, यानी जरूरत से 1 ज्यादा। बीजेपी के 98 सांसद हैं, और बाकी सहयोगियों से। अगर टीडीपी और जेडीयू जैसे सहयोगी साथ रहे, तो राज्यसभा में भी बिल पास हो सकता है। हालांकि, BJD, BRS और YSR कांग्रेस का रुख अभी साफ नहीं है। अगर ये विपक्ष के साथ गए, तो थोड़ी टेंशन हो सकती है।

व्हिप का खेल: बीजेपी, टीडीपी, जेडीयू और विपक्षी दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। यानी सबको हाजिर रहना है। अगर एनडीए एकजुट रहा, तो बिल पास होना लगभग तय है।

कोर्ट में जाएगा मामला?

विपक्ष को लगता है कि संसद में वो इस बिल को नहीं रोक पाएंगे। इसलिए उनकी नजर अब कोर्ट पर है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने साफ कह दिया है कि बिल पास हुआ तो इसे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका दावा है कि ये संविधान के खिलाफ है, और कोर्ट इसे रद्द कर सकता है। AIMPLB भी इसी रास्ते पर चलने की तैयारी में है।

बवाल की असली वजह क्या है?

अब सवाल ये है कि इस बिल पर इतना हंगामा क्यों मचा है? असल में ये सिर्फ कानून का मसला नहीं है, बल्कि भावनाओं, राजनीति और वोटबैंक का खेल भी है।

भावनाएं: मुस्लिम समुदाय के लिए वक्फ धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। इसमें बदलाव को वो अपने अधिकारों पर हमला मानते हैं।

राजनीति: विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ मुद्दा बनाकर मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में करना चाहता है। वहीं, बीजेपी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम बताकर अपनी छवि चमकाना चाहती है।

वोटबैंक: दोनों पक्ष अपने-अपने वोटरों को खुश करने की कोशिश में हैं। विपक्ष मुस्लिमों को डर दिखा रहा है, तो सरकार सुधार का ढोल पीट रही है।

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