वक्फ संशोधन विधेयक पर मोदी सरकार को मिला सूफी नेता चिश्ती का सपोर्ट, बताया सराहनीय कदम
भारतीय संसद में 2 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक रहा। मोदी सरकार द्वारा लाए गए सर्वाधिक विवादास्पद विधेयकों में एक वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में बुधवार, 2 अप्रैल को पारित हो गया। इसके बाद से भारतीय राजनीति में कई तरह की चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हो रही हैं। विधेयक के पक्ष और विपक्ष में लंबी बहस के बाद, सरकार ने इसे 288 वोटों से पारित कराया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। अब यह विधेयक 3 अप्रैल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां सरकार की असली परीक्षा होगी।
मुस्लिम दे रहे हैं अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
इस विधेयक के पारित होने के बाद, मुसलमानों के बीच विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ इसे मुस्लिम विरोधी मान रहे हैं, जबकि कई इस पर सरकार के साथ खड़े हैं। इन प्रतिक्रियाओं में सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी की है ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के अध्यक्ष, सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने, जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की तारीफ करते हुए इस विधेयक का समर्थन किया है।
सूफी नेता चिश्ती ने बताया मुसलमानों के हित में उठाया गया कदम
सूफी नेता सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने इस विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह भारत के लोकतंत्र की जीत है। यह विधेयक एक बहुत ही लोकतांत्रिक तरीके से पेश किया गया और इसके समर्थन में विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के सिद्धांत पर काम करते हैं। मैं मानता हूँ कि यह मुसलमानों के विकास के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो जाएगा। चिश्ती ने इस विधेयक के माध्यम से मोदी सरकार के प्रयासों को सराहा और साथ ही यह भी कहा कि सरकार को मुसलमानों के समग्र विकास के लिए और योजनाएँ लागू करनी चाहिए।
वक्फ विधेयक पर 12 घंटे तक हुई बहस
लोकसभा में इस विधेयक को पेश करने के बाद, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे विस्तृत रूप से चर्चा के लिए रखा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई घंटों तक यह मुद्दा गर्माया। जहाँ एनडीए के सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया, वहीं विपक्ष ने इसे मुस्लिम विरोधी बताते हुए आपत्ति जताई। गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान स्पष्ट किया कि वक्फ में कोई भी गैर-मुसलमान नहीं शामिल हो सकेगा, और इस तरह का कोई प्रावधान इसमें नहीं है।
राज्यसभा में होगी सरकार की असली परीक्षा
अब, वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। जहाँ लोकसभा में सरकार को बहुमत प्राप्त था, वहीं राज्यसभा में भी इसके पारित होने की संभावना है, लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग होती है, तो सरकार के लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा में सफलता प्राप्त करने के बाद क्या सरकार राज्यसभा में भी विधेयक पास करवा पाती है या नहीं। यद्यपि वक्फ विधेयक पर उठी बहस और प्रतिक्रियाएँ यह दर्शाती हैं कि यह एक अहम मुद्दा बन चुका है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। इस विधेयक के पास होने के बाद, देशभर में इसके दूरगामी प्रभाव पर विचार किए जा रहे हैं।
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