वक्फ संशोधन विधेयक का सेक्शन 40: विवाद बड़ा, हटाने की वजह क्या?
2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) बिल 2024 पास हो गया है और इसके सबसे बड़े बदलावों में से एक है सेक्शन 40 का खात्मा। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे वक्फ एक्ट का "सबसे कठोर प्रावधान" करार देते हुए कहा कि इसने मनमाने ढंग से जमीनों को वक्फ संपत्ति में बदलने की छूट दी थी। लेकिन यह सेक्शन 40 आखिर था क्या, और इसे हटाने से क्या बदलेगा? आइए, इसकी जड़ों में जाकर समझते हैं।
सेक्शन 40 क्या था?
वक्फ एक्ट, 1995 के सेक्शन 40 के तहत वक्फ बोर्ड को यह अधिकार था कि वह किसी भी संपत्ति की जांच कर यह तय करे कि वह वक्फ संपत्ति है या नहीं। अगर बोर्ड को लगता था कि कोई जमीन या इमारत वक्फ की हो सकती है, तो वह उस पर अपना दावा ठोक सकता था। इस फैसले को "अंतिम" माना जाता था, यानी सरकार या कोई दूसरी संस्था इसमें सीधे दखल नहीं दे सकती थी। असंतुष्ट पक्ष सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था, लेकिन वहां भी बोर्ड का फैसला ही आधार बनता था।
इसके अलावा, अगर कोई संपत्ति किसी ट्रस्ट या सोसाइटी के पास थी और बोर्ड को शक होता कि वह वक्फ की है, तो वह उसकी जांच कर उसे वक्फ एक्ट के तहत रजिस्टर करने का आदेश दे सकता था। यह प्रावधान बोर्ड को एक तरह की स्वायत्तता देता था, जिससे वह बिना बाहरी हस्तक्षेप के अपने फैसले लागू कर सके।
क्यों था विवादों में?
सेक्शन 40 को लेकर लंबे समय से विवाद रहा। सरकार और बीजेपी नेताओं का कहना है कि इसकी आड़ में वक्फ बोर्ड ने मनमाने तरीके से निजी संपत्तियों, मंदिरों, गुरुद्वारों और गांवों तक को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। तमिलनाडु के तिरुचेंथुरई गांव का मामला हो, जहां 1500 साल पुराना मंदिर और पूरा गांव वक्फ का हिस्सा बता दिया गया, या दिल्ली में इंडिया गेट और संसद भवन के कुछ हिस्सों पर दावा—ऐसे उदाहरणों ने इस प्रावधान को "कठोर" और "दुरुपयोगी" ठहराने की वजह दी। रिजिजू ने कहा कि इसका दुरुपयोग इतना हुआ कि देश की एकता को खतरा हो गया था।
इसे क्यों हटाया गया?
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में सेक्शन 40 को खत्म करने का ऐलान करते हुए रिजिजू ने तर्क दिया कि यह बदलाव पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा। अब यह तय करने का अधिकार जिला कलेक्टर को दिया जाएगा कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। सरकार का कहना है कि इससे मनमानी पर रोक लगेगी और संपत्ति विवादों में निष्पक्षता आएगी। साथ ही, वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को अब हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी, जो पहले मुमकिन नहीं था। वहीं BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे "वक्फ बोर्ड की तानाशाही" खत्म करने वाला कदम बताया।
विपक्ष के विरोध पर सरकार का जवाब
विपक्ष ने इसे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर हमला करार दिया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "सेक्शन 40 हटेगा तो वक्फ बोर्ड एक बेकार गुड़िया बन जाएगा। फिर बोर्ड रखने का क्या मतलब?" कांग्रेस और AIMIM ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर चोट बताया। दूसरी तरफ, सरकार का तर्क है कि यह धार्मिक मामलों में दखल नहीं, बल्कि संपत्ति प्रबंधन को सुधारने का कदम है। रिजिजू ने जोर देकर कहा, "यह बिल मस्जिदों या धार्मिक प्रथाओं को नहीं छूता, सिर्फ वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को पारदर्शी बनाता है।
क्या होगा असर?
वक्फ बोर्ड की ताकत घटेगी: अब बोर्ड खुद से संपत्ति पर दावा नहीं ठोक सकेगा। यह जिम्मा कलेक्टर के पास होगा, जिससे सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा।
कानूनी रास्ता खुलेगा: हाई कोर्ट में अपील का विकल्प आने से विवादित फैसलों पर नकेल कसेगी।
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