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वक्फ बिल के बाद क्या अगला निशाना धर्मांतरण कानून? अमित शाह के इस बयान ने मचा डाली बड़ी हलचल

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पास होने के बाद अमित शाह के बयान से हलचल, क्या मोदी सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून लाएगी? राजनीति गरमाई।
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वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है। लोकसभा में 2 अप्रैल को 12 घंटे की बहस के बाद 288-232 वोटों से और राज्यसभा में 3 अप्रैल को 128-95 वोटों से इसे मंजूरी मिली। बीजेपी इसे वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता और गरीब मुस्लिमों के हित का कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे संविधान और अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला करार दे रहा है। इस बीच, गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हो रहे हैं, और लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि क्या मोदी सरकार का अगला टारगेट धर्मांतरण विरोधी कानून है?

अमित शाह ने क्या कहा?

2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ विधेयक पर बहस के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए धर्मांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, "मुझे गर्व है कि मेरी पार्टी की सरकारें धर्मांतरण विरोधी कानून लाती हैं। सबको अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, शौक से करें, लेकिन लोभ, लालच या डर से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता। कोई गरीब है, उसके पास खाना नहीं है, तो क्या उसे खाना देकर उसका धर्म बदलवा दोगे? कोई कम पढ़ा-लिखा है, तो क्या उसका धर्म परिवर्तन करा दोगे? ऐसा नहीं होगा।

शाह ने आगे यह भी बोला कि कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए वक्फ को असीमित अधिकार दिए, हम उसे ठीक कर रहे हैं। लेकिन धर्म परिवर्तन का खेल भी बंद होना चाहिए।" उनके इस बयान को BJP समर्थक "साहसी कदम" बता रहे हैं, तो विपक्ष इसे "हिंदुत्व एजेंडे का अगला चरण" कह रहा है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी हलचल

शाह के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। यूजर्स ने इसे अगले बड़े कानून की आहट माना। एक यूजर ने लिखा, "वक्फ के बाद अब धर्मांतरण कानून? शाह जी ने साफ संकेत दे दिया।" एक अन्य ने कहा, "लालच और डर से धर्म बदलवाने वालों की अब खैर नहीं।" कुछ ने इसे बीजेपी की रणनीति का हिस्सा बताया, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटों पर सिमटने के बाद अपने कोर वोटरों को मजबूत करना चाहती है।

वहीं, एक यूज़र ने कहा कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय को निशाना बनाने की साजिश" है। एक यूजर ने लिखा, "पहले वक्फ, अब धर्मांतरण—यह सब अल्पसंख्यकों को दबाने की चाल है।"

क्या सच में अगला कदम फिक्स है?

शाह का बयान वक्फ बहस के संदर्भ में था, लेकिन इसके व्यापक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। BJP पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर धर्मांतरण विरोधी कानून की वकालत कर चुकी है। 2014 में शाह ने कहा भी था कि हम जबरन धर्मांतरण के खिलाफ हैं, सभी पार्टियों को इसका समर्थन करना चाहिए।" कई बीजेपी शासित राज्यों में पहले से सख्त एंटी-कन्वर्जन कानून हैं। UP का 2021 का कानून "लव जिहाद" और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाता है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

केंद्र ने अभी तक इस दिशा में कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया है। मगर शाह के बयान और वक्फ बिल की जीत ने अटकलों को हवा दी है। जानकारों का मानना है कि बीजेपी अपने हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा कानून ला सकती है, खासकर जब विपक्ष वक्फ बिल पर बंटा हुआ दिखा। JDU और TDP जैसे सहयोगियों ने बिल का समर्थन किया, लेकिन उनके अल्पसंख्यक वोटर नाराज हैं। ऐसे में धर्मांतरण कानून सहयोगियों के लिए नई चुनौती बन सकता है।

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