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भारत की RAW पर प्रतिबंध की सिफारिश: USCIRF की रिपोर्ट ने क्यों मचाया तहलका?

USCIRF 2025 रिपोर्ट में भारत पर धार्मिक भेदभाव और RAW पर बैन की सिफारिश! क्या अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा या यह सिर्फ कूटनीतिक दबाव है?
02:28 PM Mar 26, 2025 IST | Rohit Agrawal

USCIRF रिपोर्ट 2025: अमेरिकी आयोग USCIRF (यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम) ने अपनी 2025 की सालाना रिपोर्ट में भारत की जासूसी एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह सुझाव ट्रंप प्रशासन से किया गया है, जिसमें भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए "कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न" (CPC) की श्रेणी में डालने की भी बात कही गई है। रिपोर्ट में भारत पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लेकिन क्या अमेरिका वाकई RAW पर बैन लगाएगा? आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।

भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का दावा

USCIRF की 25 मार्च 2025 को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों—खासकर मुस्लिमों, ईसाइयों और सिखों के खिलाफ हमले और भेदभाव बढ़ा। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जिसके बाद जून 2024 में अल्पसंख्यकों पर हिंसा तेज हुई। इसमें दावा है कि दिल्ली समेत कई इलाकों में धार्मिक स्थलों को तोड़ा गया और अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान 6 राज्यों में अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए। रिपोर्ट ने धर्मांतरण और गोहत्या विरोधी कानूनों को भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार बताया। मिसाल के तौर पर, जुलाई 2024 में उत्तर प्रदेश में 4 पादरियों समेत 20 ईसाइयों को हिरासत में लेने और हाईकोर्ट द्वारा 12 मुस्लिमों को उम्रकैद की सजा का हवाला दिया गया।

कड़े कानूनों का दुरुपयोग?

रिपोर्ट में भारत सरकार पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) और विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों और उनके हक के लिए काम करने वाले एनजीओ को दबाने के लिए करने का आरोप है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करना भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक कदम बताया गया। USCIRF का कहना है कि ये नीतियाँ धार्मिक स्वतंत्रता को कुचल रही हैं, जिसके चलते भारत को CPC की सूची में डालना चाहिए।

RAW पर प्रतिबंध का प्रस्ताव क्यों?

रिपोर्ट में RAW और इसके कथित एजेंट विकास यादव पर प्रतिबंध की सिफारिश सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है। इसका कारण अमेरिकी नागरिक और खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जोड़ा गया है। नवंबर 2023 में फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया था कि RAW ने पन्नू की हत्या की योजना बनाई, जिसे अमेरिका ने नाकाम कर दिया। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने न्यूयॉर्क कोर्ट में एक अभियोग दायर कर कहा था कि इस साजिश को RAW चीफ सामंत गोयल ने मंजूरी दी थी।

इसमें भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता का नाम भी आया, जिसे 1 लाख डॉलर देकर पन्नू की हत्या की सुपारी दी गई थी। गुप्ता को जून 2023 में चेक रिपब्लिक में गिरफ्तार कर अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। USCIRF का कहना है कि RAW की ये हरकतें धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का हिस्सा हैं, इसलिए इसे बैन कर इसकी संपत्ति जब्त और अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

क्या कहता है भारत का पक्ष?

भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को पहले भी खारिज किया है। अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे "पक्षपाती" और "राजनीति से प्रेरित" करार दिया था। भारत का कहना है कि USCIRF उसकी विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने में नाकाम रहा है। पन्नू मामले में भी भारत ने कहा कि यह जांच का विषय है और अमेरिका के साथ सहयोग किया जा रहा है। जहाँ तक CPC या RAW पर बैन की बात है, यह सिफारिश गैर-बाध्यकारी है—अमेरिकी विदेश विभाग इस पर अंतिम फैसला लेता है, जो भारत के साथ रणनीतिक रिश्तों को ध्यान में रखेगा।

क्या अमेरिका RAW पर बैन लगाएगा?

अभी यह कहना मुश्किल है। ट्रंप प्रशासन भारत को चीन के खिलाफ एक अहम साझेदार मानता है। दिसंबर 2024 में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि भारत CPC की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। पन्नू मामला गंभीर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक और आर्थिक हितों के चलते अमेरिका शायद सख्त कदम न उठाए। फिर भी, यह रिपोर्ट भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और RAW की गोपनीयता पर सवाल उठाती है। क्या यह सिर्फ हंसी का खेल है, या गंभीर कूटनीतिक टकराव की शुरुआत? जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

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