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RIP Manoj Kumar: जब इंदिरा गांधी से भी ले लिया था लोहा, मनोज कुमार से बने 'भारत मैन'

RIP Manoj Kumar: भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग के प्रतीक और महान अभिनेता मनोज कुमार का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
12:14 PM Apr 04, 2025 IST | Ritu Shaw

RIP Manoj Kumar: भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग के प्रतीक और देशभक्ति की भावना को फिल्मों के माध्यम से जीवंत करने वाले महान अभिनेता मनोज कुमार का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। अपने उसूलों और सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले इस अभिनेता ने न सिर्फ पर्दे पर राष्ट्रभक्ति को दिखाया, बल्कि निजी जीवन में भी वही जज्बा जिया।

'भारत कुमार' की पहचान

मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी था, लेकिन उनकी फिल्मों में दिखी राष्ट्रभक्ति ने उन्हें 'भारत कुमार' बना दिया। ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘क्रांति’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने देश के प्रति प्रेम और बलिदान की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। उनका हर किरदार एक संदेश लेकर आता था, जो आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है।

इमरजेंसी में लिया था सरकार से टकराव

मनोज कुमार सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक निर्भीक नागरिक भी थे। उन्होंने इमरजेंसी के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों का खुलकर विरोध किया। शुरूआती दौर में उनके और इंदिरा गांधी के बीच अच्छे संबंध थे, लेकिन 1975 में जब देश में इमरजेंसी लगी, तब मनोज कुमार ने इसका विरोध करने का साहस दिखाया।

उनकी इस बगावत का खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा। उनकी फिल्में ‘दस नंबरी’ और ‘शोर’ बैन कर दी गईं। ‘शोर’ को सिनेमाघरों में रिलीज से पहले ही दूरदर्शन पर प्रसारित कर दिया गया, जिससे फिल्म की कमाई बुरी तरह प्रभावित हुई।

कोर्ट में मिली ऐतिहासिक जीत

जब सरकार ने उनकी फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया, तब मनोज कुमार ने हार मानने की बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कई हफ्तों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद उन्हें न्याय मिला और वे इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ केस जीतने वाले इकलौते फिल्ममेकर बन गए।

सरकारी ऑफर को ठुकराकर दिखाई असल ‘शान’

सरकार ने उन्हें ‘इमरजेंसी’ पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसकी स्क्रिप्ट मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम लिख रही थीं। लेकिन मनोज कुमार ने न सिर्फ इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, बल्कि अमृता प्रीतम को भी खरी-खोटी सुनाई। उनका कहना था कि वे कभी उस सत्ता के लिए फिल्म नहीं बनाएंगे, जिसने अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाया।

एक प्रेरणा, जो कभी नहीं भुलाई जाएगी

मनोज कुमार का जीवन, उनका संघर्ष और उनका सिनेमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके अंदर बसा देशप्रेम, उनके निडर विचार और सशक्त अभिनय भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा अमर रहेंगे। भारत कुमार अब भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनका देशभक्ति से भरा सफर आने वाले समय में भी हमेशा गर्व से याद किया जाएगा।

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