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‘शरबत जिहाद’ बयान पर बुरे फंसे बाबा रामदेव, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई खरी-खोटी, बोली- अंतरात्मा जगाइए!

बाबा रामदेव ने रूह अफजा को 'शरबत जिहाद' कहकर विवाद खड़ा किया, दिल्ली हाईकोर्ट ने हेट स्पीच मानते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
01:26 PM Apr 22, 2025 IST | Rohit Agrawal

Ramdev Sharbat Jihad statement: योग गुरु बाबा रामदेव शरबत जिहाद वाले बयान को लेकर बुरे फंस गए हैं। दरअसल उनपर आरोप है कि उन्होंने हमदर्द की रूह अफजा को “शरबत जिहाद” कहकर मस्जिद-मदरसा बनाने का दावा किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल 2025 को सुनवाई के दौरान इसे “हेट स्पीच” और “अस्वीकार्य” बताया। इसको लेकर हमदर्द कंपनी ने रामदेव बाबा पर मानहानि का केस ठोका। वहीं कोर्ट ने कड़ा आदेश देने की चेतावनी दी। आइए, खबर को जानें विस्तार से!

रामदेव बाबा ने क्या कह दिया था?

दरअसल 3 अप्रैल 2025 को पतंजलि के गुलाब शरबत को बढ़ावा देते हुए रामदेव ने कहा था कि एक शरबत पीने से मस्जिद-मदरसे बनते हैं, पतंजलि का शरबत गुरुकुल और विश्वविद्यालय बनाता है। उन्होंने सांकेतिक तौर पर रूह अफजा को “शरबत जिहाद” और “लव जिहाद” जैसी साजिश से जोड़ा। पतंजलि ने फेसबुक पर लिखा कि शरबत जिहाद से बच्चों को बचाएं, पतंजलि शरबत लाएं। उनकी इस वीडियो को 37 मिलियन व्यूज मिले, लेकिन हमदर्द ने इसे सांप्रदायिक और मानहानिकारक बताकर कोर्ट में याचिका दायर की।

 

“अंतरात्मा को झकझोरने वाला मामला”: हाइकोर्ट ने लगाई फटकार

21 अप्रैल को जस्टिस अमित बंसल ने सुनवाई में रामदेव के बयान को “कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरने वाला” बताया। हमदर्द के वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि रामदेव ने रूह अफजा को बदनाम कर सांप्रदायिक विभाजन की कोशिश की। यह हेट स्पीच है।” कोर्ट ने रामदेव के वकील को 22 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है वरना उनपर “कड़ा आदेश” होगा। रोहतगी ने बताया कि रामदेव ने हिमालया जैसी दूसरी कंपनियों को भी निशाना बनाया।

रामदेव ने किया बचाव तो हमदर्द का पलटवार

अपने खुद के बयान पर 18 अप्रैल को रामदेव ने सफाई देते हुए कहा कि मैंने हमदर्द का नाम नहीं लिया। रूह अफजा वालों ने खुद ‘जिहाद’ अपने ऊपर लिया, मतलब वे ऐसा करते हैं।” बता दें इसने विवाद को और भड़का दिया। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भोपाल में FIR की मांग की, BNS और IT एक्ट के तहत कार्रवाई मांगी। हमदर्द ने कहा कि रूह अफजा FSSAI मानकों वाला प्राकृतिक उत्पाद है। याचिका में वीडियो हटाने की मांग की गई।

क्यों अहम है यह मामला?

रामदेव का बयान व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मामला है। कोर्ट ने इसे हेट स्पीच माना, जो भारत की एकता के लिए खतरनाक है। वहीं रामदेव का इतिहास विवादास्पद रहा है। उन्हें 2021 में कोरोनिल और 2023 में भ्रामक विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार मिल चुकी है। हमदर्द की 100 साल की विरासत पर हमला रामदेव को भारी पड़ सकता है।

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