लोकसभा में आज रखा जाएगा वक्फ बिल, सरकार के पास है स्पष्ट बहुमत
लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा, और इसके पारित होने की संभावना काफी प्रबल है। इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का विरोध साफ तौर पर देखा जा रहा है, और सदन में इस पर तीव्र बहस होने की पूरी संभावना है। आइए जानते हैं इस विधेयक को लेकर क्या हैं सरकार और विपक्ष की रणनीतियाँ और इस बिल को पारित कराने में क्या-क्या चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
सत्तारूढ़ पक्ष की स्थिति मजबूत, विपक्ष का विरोध जारी
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार ने सभी साथी दलों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद बुधवार को इसे लोकसभा में पेश करने का निर्णय लिया है। हालांकि, विपक्षी दल इसे लेकर विरोध कर रहे हैं और इस पर सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने की योजना बना रहे हैं। लेकिन, सत्तारूढ़ राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के प्रमुख सहयोगी दल जैसे जनता दल यूनाइटेड (जदयू), तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), शिवसेना, और अन्य पार्टियाँ इस विधेयक के पक्ष में खड़ी हैं।
लोकसभा में सरकार के पास है पर्याप्त बहुमत
लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे विधेयक के पारित होने की संभावना मजबूत है। संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इस बिल को सभी राजग दलों का समर्थन प्राप्त है, और वे उम्मीद कर रहे हैं कि विपक्ष के कुछ सांसद भी इसे समर्थन देंगे। माना जा रहा है कि कुछ विपक्षी दल अथवा सांसद इस मुद्दे पर सदन से वॉक आउट भी कर सकते हैं। ऐसे में सरकार का पक्ष और भी अधिक मजबूत हो जाएगा।
लोकसभा में आधे से अधिक सांसद हैं एनडीए के पास
लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 542 है जिनमें से 240 सदस्य अकेले भाजपा के हैं जबकि सहयोगी दलों को मिलाकर भाजपा के 293 सांसद हैं। विपक्ष के सभी सांसदों की संख्या कुल मिलाकर 237 हैं जबकि सदन में कुछ छोटे दल और निर्दलीय भी मौजूद हैं जिन्होंने अभी अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है। परंतु माना जा रहा है कि वे भी सरकार के साथ ही जा सकते हैं। ऐसे में यह बिल लोकसभा में आसानी से पास होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिल पर बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह रहेंगे मौजूद
गृह मंत्री अमित शाह की लोकसभा में उपस्थिति विधेयक पर होने वाली बहस को और भी महत्वपूर्ण बना देती है। भाजपा के वरिष्ठ नेता इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए तैयार हैं। मंगलवार को, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस विधेयक पर आठ घंटे की चर्चा के लिए सहमति बनी है, हालांकि इसे जरूरत पड़ने पर और बढ़ाया भी जा सकता है।
विधेयक में संशोधन को लेकर विपक्ष ने उठाए विरोध के स्वर
पिछले साल अगस्त में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था। जेपीसी ने कई बदलावों के सुझाव दिए थे, जिन्हें अब नए संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। इन बदलावों के बाद विधेयक को फिर से लोकसभा में पेश किया जा रहा है। विधेयक के पक्ष में वोटिंग को लेकर सभी सहयोगी दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है, और अब यह देखना होगा कि विपक्ष कितनी संख्या में सदन से बाहर जाता है और कितने सदस्य इस बिल का विरोध करते हैं।
विपक्ष की रणनीतियाँ और संभावित वॉकआउट
विपक्षी दलों के लिए यह विधेयक एक बड़ी चुनौती बन सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है, ताकि वे विधेयक के खिलाफ वोट करें और सदन में मौजूद रहें। हालांकि, यह भी संभावना जताई जा रही है कि विपक्षी दल सदन से वॉकआउट कर सकते हैं, जिससे विधेयक की चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
राज्यसभा में पारित होने की संभावना
यदि यह विधेयक लोकसभा में पास हो जाता है, तो इसकी संभावना है कि गुरुवार को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में सत्ता पक्ष को इसे पारित कराने के लिए 119 सदस्य की आवश्यकता होगी, और भाजपा के पास 125 से अधिक सदस्य हैं, जिनमें सहयोगी दलों के सदस्य भी शामिल हैं। विपक्ष की ओर से इसका विरोध किया जाएगा, लेकिन सरकार की स्थिति मजबूत दिख रही है।
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