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सड़क पर नमाज पढ़ी तो जब्त होगा पासपोर्ट और लाइसेंस; मेरठ पुलिस का ये फरमान देखा क्या?

मेरठ पुलिस ने एलान किया कि सड़क पर नमाज पढ़ने पर FIR होगी, दोषी पाए जाने पर पासपोर्ट व DL रद्द हो सकता है। कानून-व्यवस्था या भेदभाव?
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Meerut Police's order on Namaz: ईद-उल-फितर और रमजान के आखिरी शुक्रवार (अलविदा जुमा) की नमाज से पहले मेरठ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। 27 मार्च 2025 को जारी एक फरमान में पुलिस ने साफ कहा है कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी, जिसमें पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द करने जैसे कदम शामिल हैं। यह कदम शांति और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। आइए, पूरी रिपोर्ट देखते हैं।

पुलिस ने कर दिया ऐलान: सड़क पर नमाज बर्दाश्त नहीं?

मेरठ में आज होने वाली अलविदा जुमा और जल्द आने वाली ईद-उल-फितर को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (ASP सिटी) आयुष विक्रम सिंह ने कहा, "ईद और शुक्रवार की नमाज मस्जिदों या नामित ईदगाहों में ही अदा की जानी चाहिए। सड़कों पर नमाज पढ़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है।" उन्होंने बताया कि पिछले साल भी कुछ लोगों ने नियम तोड़े थे, जिसके चलते 80 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई हुई। इस बार भी उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

ASP ने चेतावनी दी कि "अगर कोई सड़क पर नमाज पढ़ता पाया गया, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी। आपराधिक मामले में दोषी पाए जाने पर पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कोर्ट से नॉन-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बिना नया पासपोर्ट लेना असंभव होगा। ये दस्तावेज तब तक जब्त रहेंगे, जब तक व्यक्ति अदालत से बरी न हो जाए।"

योगी की पुलिस ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विपिन ताड़ा ने बताया कि जिला प्रशासन, पुलिस, और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर शांति सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है। "जिला और थाना स्तर पर शांति समिति की बैठकें हुई हैं। सभी पक्षों को गाइडलाइंस दी गई हैं। संवेदनशील इलाकों में पीएसी, रैपिड ऐक्शन फोर्स (RAF), और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन और CCTV से निगरानी होगी। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।"

पुलिस ने धर्मगुरुओं और इमामों से अपील की है कि वे लोगों को मस्जिदों या ईदगाहों में ही नमाज अदा करने के लिए प्रेरित करें। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च और खुफिया निगरानी भी तेज कर दी गई है।

मामले पर सामने आईं मिली जुली प्रतिक्रियाएं

मेरठ पुलिस के इस फरमान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कुछ लोग इसे यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी मान रहे हैं, तो कुछ इसे पक्षपातपूर्ण बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों में सड़कें लंबे समय तक जाम रहती हैं, लेकिन उस पर इतनी सख्ती नहीं दिखती। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी इस आदेश की आलोचना की और इसे "ऑरवेलियन 1984 पुलिसिंग" से जोड़ा, जिसका मतलब है अति निगरानी और सख्ती। उन्होंने कहा, "सड़कों को खाली रखने के लिए संवेदनशीलता के साथ संवाद करना चाहिए, न कि पासपोर्ट छीनने की धमकी देनी चाहिए।

वहीं मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं ने भी नाराजगी जताई। जमीयत दावत-उल-मसलमान के मौलाना इसहाक गोरा ने कहा, "हर ईद पर नया विवाद खड़ा करना ठीक नहीं। नमाज को अपराध की तरह पेश करना गलत है।

पिछली घटना से सबक सीख लिया इस बार एक्शन

पिछले साल 2024 में ईद-उल-फितर के दौरान मेरठ में सड़क पर नमाज पढ़ने की घटनाएँ हुई थीं। पुलिस ने बैरिकेडिंग की, लेकिन कुछ नमाजियों ने इसे तोड़कर सड़क पर नमाज अदा की। तब 200 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें 80 की पहचान हुई थी। इस बार पुलिस पहले से सतर्क है और कोई ढील नहीं देना चाहती।

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