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‘बेबी, तू आया नहीं, तूने कहा था…,’ शहीद सिद्धार्थ यादव के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोती रही मंगेतर, जवानों की भी भर आईं आंखें

जामनगर में जगुआर क्रैश में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव को सैन्य सम्मान संग विदाई, सगाई के 10 दिन बाद शादी की जगह मातम पसरा।
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हरियाणा के रेवाड़ी के भालखी माजरा गांव में आज एक माहौल ऐसा था, जहां गर्व और गम दोनों साथ-साथ थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव, जो 2 अप्रैल 2025 को गुजरात के जामनगर में जगुआर विमान क्रैश में शहीद हुए, उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। 28 साल के सिद्धार्थ की चिता को उनके पिता सुशील यादव ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर उनकी मंगेतर सानिया भी पहुंचीं, जिनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सिद्धार्थ की तस्वीर देखकर सानिया ने रुंधे गले से कहा, “बेबी, तू आया नहीं मुझे लेने, तूने कहा था तू आएगा।” उनकी ये बातें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सिद्धार्थ की सगाई 23 मार्च को हुई थी, और 10 दिन बाद ही वह देश के लिए शहीद हो गए। उनकी शादी 2 नवंबर को तय थी, लेकिन अब वह खुशी का माहौल मातम में बदल गया।

खुद को बलिदान कर बचा लिया हजारों को?

सिद्धार्थ उस रात जामनगर में एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन पर थे। भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान उड़ाते वक्त तकनीकी खराबी आ गई। जब यह साफ हो गया कि क्रैश टाला नहीं जा सकता, सिद्धार्थ ने अपने को-पायलट मनोज कुमार को इजेक्ट कराया और विमान को घनी आबादी से दूर ले गए। रात 9:30 बजे सुवरदा गांव के पास खेतों में विमान गिरा और आग का गोला बन गया। सिद्धार्थ ने अपनी जान देकर न सिर्फ अपने साथी की जान बचाई, बल्कि सैकड़ों नागरिकों को भी खतरे से दूर रखा। उनकी यह बहादुरी उनकी ड्यूटी और देश के प्रति समर्पण को दिखाती है। उनकी पार्थिव देह आज सुबह रेवाड़ी लाई गई, और काफिले के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई।

परिवार का क्या है हाल?

सिद्धार्थ की मां सुशीला यादव ने कहा कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है। मैं हर मां से कहती हूं कि अपने बेटों को देशसेवा के लिए सेना में भेजें। वो मेरे लिए शहीद हुआ, उसकी जननी होने पर मुझे फख्र है।” उनकी आवाज में गर्व था, लेकिन आंखों में बेटे को खोने का दर्द साफ झलक रहा था। सिद्धार्थ के पिता सुशील, जो खुद वायुसेना से रिटायर हैं, ने बताया कि चार पीढ़ियों से उनका परिवार सेना में रहा है। उन्होंने कहा, “वो इजेक्ट कर सकता था, लेकिन उसने लोगों को बचाने के लिए ऐसा नहीं किया। उसका सपना था कि चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनकर घर लौटे। अब वो शहीद होकर लौटा।” सिद्धार्थ की छोटी बहन खुशी भी रोती रही। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, नया घर बनाया गया था, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसर गया।

10 दिन पहले हुई थी सगाई मंगेतर ने सुनाई दर्द भरी दास्तां...

सानिया, जिनसे सिद्धार्थ की सगाई हुई थी, वह भी श्मशान घाट पर पहुंचीं। वह बार-बार कहती रहीं, “प्लीज उसकी शक्ल एक बार दिखा दो।” सिद्धार्थ की तस्वीर को देखकर वह फूट-फूटकर रो पड़ीं। वह करहाते हुए बोलीं कि मुझे उस पर गर्व है, लेकिन वो मुझे छोड़ गया।” सगाई के बाद 31 मार्च को सिद्धार्थ ड्यूटी पर लौटे थे, और परिवार को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी। 2 नवंबर को शादी की तारीख तय थी, लेकिन अब सानिया के हाथों में हल्दी की जगह सिद्धार्थ की यादें और अधूरे वादे ही बचे हैं।

शहीद सिद्धार्थ के बलिदान की कहानी

सिद्धार्थ यादव की कहानी हर उस इंसान को छूती है, जो देश के लिए बलिदान की कीमत समझता है। वह एक होनहार पायलट थे, जिन्होंने 2016 में NDA जॉइन किया और 2020 में फाइटर पायलट बने। उनके परिवार की चार पीढ़ियां सेना में रही हैं, और सिद्धार्थ ने इस परंपरा को गर्व के साथ आगे बढ़ाया। उनकी शहादत ने न सिर्फ उनके परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे देश को उनके बलिदान का एहसास कराया। यह कहानी रुलाती है, लेकिन साथ ही गर्व भी कराती है कि ऐसे नौजवान देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर देते हैं। सिद्धार्थ अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनकी वीरता हमेशा जिंदा रहेगी।

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