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भारतीय नौसेना में अगले महीने शामिल होंगे दो युद्धपोत और एक पनडुब्बी, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन को देंगे चुनौती

अगले महीने भारतीय नौसेना में तीन नए युद्धपोत और एक पनडुब्बी शामिल किए जाएंगे। यह कदम हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों का सामना करने के लिए उठाया गया है।
03:40 PM Dec 30, 2024 IST | Vyom Tiwari

Indian navy latest warships: भारतीय नौसेना की ताकत अब और भी मजबूत होने जा रही है। अगले महीने भारतीय नौसेना में दो नए स्वदेशी युद्धपोत और एक पनडुब्बी (Submarines) शामिल होंगे। ये कदम खास तौर पर हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी का मुकाबला करने के लिए उठाया जा रहा है। रूस में बना INS तुषिल भी भारत आ रहा है। जो नए युद्धपोतों को भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं, उनमें 7400 टन का INS सूरत (INS Surat) , 6670 टन का INS नीलगिरि (INS Nilgiri) और 1600 टन का INS वाघशीर (INS Vaghsheer) शामिल हैं। ये सभी युद्धपोत अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं।

INS सूरत नौसेना का पहला AI-सक्षम युद्धपोत

मुंबई के मझगांव डॉक ने पिछले हफ्ते सूरत और नीलगिरि युद्धपोतों को भारतीय नौसेना को सौंप दिया । सूरत का आकार 164 मीटर लंबा है, और यह INS विशाखापत्तनम, INS मुंबई और INS इंफाल जैसे प्रमुख युद्धपोतों के समूह में शामिल होगा। ये सभी युद्धपोत 35000 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रोजेक्ट-15B का हिस्सा हैं, जिन्हें मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) में तैयार किया गया है। एक अधिकारी के अनुसार, ‘सूरत नौसेना का पहला AI-सक्षम युद्धपोत है, जो इसके संचालन की क्षमता को काफी बढ़ा देगा।’

प्रोजेक्ट-17A के तहत बनाये जा रहे 7 युद्धपोत 

यह वॉरशिप 72% स्वदेशी सामग्री से बना है और 4000 समुद्री मील तक यात्रा कर सकता है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, 76 मिमी सुपर रैपिड गन, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं। नीलगिरि वॉरशिप 45,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-17A के तहत बनाए जा रहे सात युद्धपोतों में से पहला है। इनमें से चार मुंबई के MDL में और तीन कोलकाता के GRSE में बन रहे हैं। ये सभी युद्धपोत दुश्मन के रडार से बचने के लिए खास डिजाइन किए गए हैं, और इनकी डिलीवरी 2026 के अंत तक पूरी होनी है।

भारतीय शिपयार्ड में 60 युद्धपोत और जहाज निर्माणाधीन

वाघशीर, जो कि भारतीय नौसेना की छठी और आखिरी स्कॉर्पीन या कलवरी-क्लास पनडुब्बी है, इसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में 23,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के 'प्रोजेक्ट-75' के तहत बनाया गया है। भारत और फ्रांस अब तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को लेकर आखिरी दौर की बातचीत में हैं, जो MDL में लगभग 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएंगी। इनमें से पहली पनडुब्बी छह साल में तैयार होगी, जबकि बाकी दो हर साल के अंतराल पर तैयार की जाएंगी।

इस समय भारतीय शिपयार्ड में 60 युद्धपोत और जहाज निर्माणाधीन हैं। इनमें से 3900 टन का INS तुषिल जल्द ही भारत पहुंचने वाला है, जो बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर से होते हुए आएगा। अगले साल मार्च-अप्रैल तक रूस से एक और युद्धपोत "तमल" भी भारत पहुंचेगा।

2030 तक 155-160 होंगे युद्धपोत

भारत की नौसेना को अब 31 नए युद्धपोतों के लिए ‘अधिकार प्राप्त करने’ (AoN) की मंजूरी मिल गई है, जिससे इसकी ताकत और भी बढ़ेगी। इन नए युद्धपोतों में सात नई पीढ़ी के युद्धपोत, आठ कार्वेट और छह स्टील्थ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हैं। हालांकि, भारतीय शिपयार्ड में निर्माण की धीमी गति और पुराने युद्धपोतों के रिटायर होने के कारण, नौसेना को 2030 तक केवल 155-160 युद्धपोतों तक ही पहुंचने का अनुमान है।

चीनी नौसेना के पास 370 से ज्यादा जहाज और पनडुब्बियां

चीन इन दिनों तेजी से युद्धपोत और पनडुब्बियां बना रहा है। वह हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ा रहा है और नए विदेशी ठिकाने ढूंढ रहा है। अगर हम संख्या की बात करें, तो उसके पास पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, जिसमें 370 से ज्यादा जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं, जिनमें 140 बड़े लड़ाकू जहाज भी हैं। यह भारत के लिए एक गंभीर चुनौती बन रही है। अब भारत की नौसेना को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए जल्दी से कदम उठाने की जरूरत है।

 

 

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