सोरोस की फंडिंग और USAID का 8 करोड़ का कनेक्शन: ED ने खोला बड़ा राज
अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के फाउंडेशन से जुड़ी कंपनियों की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सनसनीखेज खुलासा किया है। बेंगलुरु की एक कंपनी, जो सोरोस के फंड से पैसा ले रही थी, उसे अमेरिकी एजेंसी USAID से भी 8 करोड़ रुपये मिले। यह मामला अब सिर्फ सोरोस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि USAID भी जांच के घेरे में आ गई है। ट्रंप के निशाने पर रही इस एजेंसी और सोरोस के बीच की यह कड़ी सियासी तूफान खड़ा कर सकती है।
जांच में क्या खुलासा हुआ?
ED की ताजा जांच सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) से बेंगलुरु की तीन कंपनियों को मिले 25 करोड़ रुपये के इर्द-गिर्द घूम रही है। यह जांच फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के उल्लंघन को लेकर चल रही है। इसी बीच पता चला कि इनमें से एक कंपनी, ASAR सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स, को 2022-23 में USAID से 8 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली। ASAR ने दावा किया कि यह पैसा दिल्ली के थिंक टैंक काउंसिल ऑफ एनर्जी, एन्वायर्नमेंट एंड वॉटर (CEEW) को सर्विस देने के बदले मिला। लेकिन ED को इस दावे पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
सोरोस से लेकर USAID तक का खेल
सोरोस का ओपन सोसायटी फाउंडेशन (OSF) भारत में 1999 से सक्रिय है, लेकिन 2016 से यह गृह मंत्रालय की निगरानी में है। नियमों के मुताबिक, OSF को भारत में किसी भी संस्था को फंडिंग से पहले मंजूरी लेनी पड़ती है। ED का आरोप है कि इन नियमों को दरकिनार करने के लिए सोरोस ने FDI और कंसल्टेंसी फीस के जरिए पैसा भेजा। अब USAID का नाम जुड़ने से मामला और पेचीदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही USAID को "वामपंथी एजेंडा" चलाने का आरोपी ठहरा चुके हैं। ऐसे में यह खुलासा भारत-अमेरिका के रिश्तों पर भी सवाल उठा सकता है।
बाकी दो कंपनियों का हाल
बेंगलुरु की रूटब्रिज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और रूटब्रिज एकेडमी लिमिटेड नाम की दो कंपनियां भी ED के रडार पर हैं। इन दोनों को 2021 से 2024 के बीच सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड से पैसा मिला। जांच में संदेह है कि यह फंडिंग NGO को फायदा पहुंचाने के लिए थी, जो FEMA नियमों का उल्लंघन है। पिछले महीने ED ने OSF के बेंगलुरु दफ्तरों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद यह पूरा मामला और गहरा गया।
सियासी हलकों में भी बड़ी हलचल
इस जांच ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। CEEW के ट्रस्टियों में मोंटेक सिंह अहलूवालिया और सुरेश प्रभु जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो मोदी सरकार से भी जुड़े रहे हैं। BJP पहले ही सोरोस पर भारत विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा चुकी है। अब USAID का नाम आने से विपक्ष पर हमले तेज हो सकते हैं। सवाल यह है कि क्या यह फंडिंग सिर्फ बिजनेस थी, या इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा था? ED की जांच अभी जारी है, और आने वाले दिन इस रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं।
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