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CJI सहित 30 जजों ने वेबसाइट पर दी संपत्ति की जानकारी

यह फैसला 1 अप्रैल को हुई सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया था, जहां यह तय किया गया कि अब से सीजेआई के समक्ष प्रस्तुत की गई जजों की संपत्तियों के ब्योरे को सार्वजनिक किया जाएगा।
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न्याय तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी संपत्ति का पूरा विवरण सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। अब, चीफ जस्टिस संजीव खन्ना समेत सुप्रीम कोर्ट के 30 जजों ने अपनी संपत्तियों के बारे में जानकारी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दी है। इस फैसले से न्यायपालिका में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा और जनता में विश्वास को मजबूत किया जाएगा।

संपत्ति की घोषणा करना पहले स्वैच्छिक था, अब अनिवार्य हुआ

यह फैसला 1 अप्रैल को हुई सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया था, जहां यह तय किया गया कि अब से सीजेआई के समक्ष प्रस्तुत की गई जजों की संपत्तियों के ब्योरे को सार्वजनिक किया जाएगा। पहले यह जानकारी केवल सीजेआई तक सीमित थी और जजों द्वारा अपनी संपत्ति की जानकारी वेबसाइट पर डालने का फैसला स्वेच्छा पर निर्भर था। लेकिन अब यह नियम बदल दिया गया है और अब सभी जजों को अपनी संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

आम आदमी देख सकेंगे जजों की संपत्ति से जुड़ी सारी जानकारी

इस फैसले के तहत, सीजेआई संजीव खन्ना के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के अन्य 30 जजों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है। इनमें प्रमुख जजों में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस अभय एस ओक, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस बीवी नागरत्ना का नाम शामिल है। अब इन सभी जजों के संपत्ति के विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिन्हें कोई भी आम नागरिक देख सकता है।

Justice Yashwant Varma

हाल ही सामने आए विवादों के बाद लिया गया यह फैसला

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कुछ विवाद सामने आए हैं। हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने का मामला सामने आया था। 14 मार्च को आग लगने की घटना के दौरान, जस्टिस वर्मा के आवासीय परिसर से फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने नोटों की गड्डियां देखी थीं। इस घटना के बाद सीजेआई ने 22 मार्च को जस्टिस वर्मा के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की थी। इस घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा अपनी संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक करना एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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