American Lifetime Prison: अमेरिका में भारतीय मूल के व्यक्ति को 35 साल की सजा, बेहद शर्मनाक है हरकत
American Lifetime Prison: अमेरिका में एक संघीय अदालत ने 31 वर्षीय भारतीय मूल के साई कुमार कुररेमुला को कई बच्चों के यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े मामलों में दोषी पाते हुए 35 साल (420 माह) की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह व्यक्ति इमिग्रेंट वीजा पर ओक्लहोमा के एडमंड में रह रहा था।
सोशल मीडिया के जरिए बच्चों को बनाया शिकार
कुररेमुला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खुद को किशोर के रूप में प्रस्तुत करता था और कम उम्र के लड़के-लड़कियों से दोस्ती करता था। उनका विश्वास जीतने के बाद, वह उन्हें चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री साझा करने के लिए उकसाता और उनकी मर्जी के खिलाफ जाने पर उन्हें धमकाता था।
अदालत का कड़ा फैसला
अमेरिकी अटॉर्नी रॉबर्ट ट्रॉस्टर ने बताया कि आरोपी पर तीन बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री रखने के आरोप साबित हुए हैं। अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट जज चार्ल्स गुडविन ने अपने आदेश में कहा कि कुररेमुला की सजा पूरी होने के बाद भी वह आजीवन निगरानी में रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के कृत्य से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
जुर्म कबूला, नाबालिगों को दी थी धमकियां
सुनवाई के दौरान कुररेमुला ने यह स्वीकार किया कि उसने एक नाबालिग को धमकी दी थी कि वह उसके घर जाकर उसके माता-पिता को उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाएगा। इसके अलावा, उसने एक अन्य नाबालिग को भी धमकाया कि यदि उसकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वह उनकी तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर देगा।
FBI जांच में खुलासा
संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने अक्टूबर 2023 में एक सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप पर संदिग्ध गतिविधियों वाले एक अकाउंट की जांच शुरू की थी। इस अकाउंट से जुड़े इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) पते की ट्रैकिंग के बाद जांच एजेंसियां कुररेमुला तक पहुंचीं और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कम से कम 19 नाबालिग बने शिकार
एफबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि कुररेमुला ने सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप के जरिए कम से कम 19 नाबालिगों का यौन शोषण किया था। इन मामलों ने पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों पर गंभीर मानसिक और भावनात्मक प्रभाव डाला है।
सरकारी अधिकारियों की सख्त चेतावनी
अमेरिकी अटॉर्नी रॉबर्ट ट्रॉस्टर ने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो बच्चों को अपना निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के सबसे नाजुक और कमजोर वर्ग – हमारे बच्चों – के खिलाफ एक भयानक अन्याय है।"
ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
यह मामला ऑनलाइन खतरों के प्रति जागरूकता की जरूरत को रेखांकित करता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि वे किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रह सकें। एफबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे अपराधों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं।
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