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America Iran Issue: अमेरिका ने ईरान के करीब तैनात किए खतरनाक बमवर्षक विमान, ईरान को मैसेज देने कोशिश?

America Iran Issue: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को यमन में दर्जनों हूती विद्रोहियों को मार गिराने वाली मिलिट्री एयर स्ट्राइक की वीडियो शेयर की।
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America Iran Issue: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को यमन में दर्जनों हूती विद्रोहियों को मार गिराने वाली मिलिट्री एयर स्ट्राइक की वीडियो शेयर की। यह घटना ऐसे वक्त हुई जब अमेरिका ने कुछ दिनों पहले ही हिंद महासागर में एक द्वीप डिएगो गार्सिया में छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर प्लेन भेजे थे। इसे एक्सपर्ट ईरान और हूतियों सहित उसके समर्थकों को रोकने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

ऐसा विमान जिसे कहा जाता है आसमान का भूत

दुनिया के सबसे एडवांस विमानों में से एक, जिसे आसमान का भूत कहा जाता है। इसकी ईरान के समुद्र तट से सिर्फ 2,400 मील की दूरी पर बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले से ही उबल रहे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। प्लैनेट लैब्स पीबीसी की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि द्वीप के एयरबेस पर छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स हैं। इसका मैनेजमेंट अमेरिका और ब्रिटेन की सेना करती है। यह अमेरिका के स्टील्थ बॉम्बर बेड़े का 30 फीसदी है।

बी-2 स्टील्थ बमर्षक क्यों?

इसकी वजह साफ है। यह अमेरिका के पास सबसे अच्छा और यकीनन दुनिया का बेहतरीन युध्द विमान है। एक बमवर्षक विमान की कीमत 2 बिलियन डॉलर है और एयर डिफेंस के साथ-साथ यह रडार से आसानी से भी बच सकते हैं। बी-2 दुनिया में किसी भी टारगेट तक पहुंच सकता और बेस पर वापस आ सकता है। इसमें हवा में ही ईधन भी भरा जा सकता है। कोल्ड वॉर के वक्त के इन लड़ाकू विमानों का उपयोग पहले भी हूतियों को टारगेट करने के लिए किया गया। बी-2 को इस तरह से डिजाइन किया गया कि इसमें पायलटों के लिए खाना रखने और गर्म करने के साथ-साथ टॉयलेट की भी फैसिलिटी है। अब तक युद्ध में कोई भी बी-2 विमान तबाह नहीं हुआ।

यहां पर हुई तैनाती

बमवर्षक विमानों की तैनाती डिएगो गार्सिया में अचानक नहीं हुई। इसे ट्रंप की ओर से आक्रामक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कई हफ्ते से अमेरिका, यमन में हूतियों पर बमबारी कर रहा है। सबसे बड़ा हमला मार्च में हुआ था। जब हवाई हमलों में 53 विद्रोही मारे गए थे और करीब 100 घायल हुए थे। यह भारी तैनाती यह मैसेज देने का भी एक कदम है कि वह ट्रंप प्रशासन के साथ अपने परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत करे। ट्रंप ने ईरान के बड़े नेता अयातुल्लाह खामेनेई को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने नए परमाणु समझौते पर पहुंचने के लिए दो महीने की डेडलाइन या फिर परिणाम भुगतने की वार्निंग दी थी।

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