'मुसलमानों ने मुझे रिकॉर्ड वोट दिए': व्हाइट हाउस इफ्तार पार्टी में ट्रंप ने कह दी ये बड़ी बात, खुश हुआ मुस्लिम समाज
White House Iftar: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 मार्च 2025 को व्हाइट हाउस में इफ्तार डिनर की मेजबानी की, जिसमें मुस्लिम समुदाय के नेताओं, डिप्लोमैट्स और सरकारी अधिकारियों ने शिरकत की। इस मौके पर ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मुस्लिम-अमेरिकियों के अभूतपूर्व समर्थन के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि"मैं उन लाखों मुस्लिम-अमेरिकियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने नवंबर 2024 में रिकॉर्ड संख्या में हमें वोट दिया। यह अविश्वसनीय था। आप मेरे साथ थे, और जब तक मैं राष्ट्रपति हूँ, मैं आपके साथ रहूँगा।"
इफ्तार में ट्रंप का गर्मजोशी से स्वागत
ट्रंप ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा, "गुड ईवनिंग! इस इफ्तार डिनर में आपका स्वागत है। यह बेहद खास है। रमज़ान के पवित्र महीने में मैं अपने मुस्लिम दोस्तों को कहना चाहता हूँ—रमज़ान मुबारक!" अपने संबोधन में उन्होंने रमज़ान को आध्यात्मिक चिंतन और संयम का महीना बताया और मुस्लिम समुदाय की भक्ति की सराहना की। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में यह भी कहा, "अगर आपको खाना पसंद न आए तो शिकायत मत करना, आप फिर भी व्हाइट हाउस में हैं।"
मिडिल ईस्ट में शांति का किया वादा?
ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने की अपनी कोशिशों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, "हमारा प्रशासन मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति के लिए अथक कूटनीति कर रहा है।" यह बयान उस संदर्भ में अहम है, जब अक्टूबर 2023 से इज़राइल और हमास के बीच संघर्ष जारी है। ट्रंप ने मेहमानों से कहा, "व्हाइट हाउस में आपके पास कोई है जो आपसे प्यार करता है। हम सभी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने को प्रतिबद्ध हैं।"
व्हाइट हाउस में इफ्तार का इतिहास
व्हाइट हाउस में इफ्तार की परंपरा 1996 में हिलेरी क्लिंटन के समय शुरू हुई थी। जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने इसे हर साल जारी रखा। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2017 में यह आयोजन नहीं किया था, जिसकी आलोचना हुई थी। हालाँकि, 2018 और 2019 में उन्होंने इफ्तार की मेजबानी की। 2020 में कोविड-19 की वजह से यह रुक गया था। 2025 में यह आयोजन उनकी वापसी और मुस्लिम समुदाय के साथ नए रिश्ते की ओर इशारा करता है।
क्यों मिला मुस्लिम समर्थन?
ट्रंप का यह बयान 2024 के चुनाव में मुस्लिम-अमेरिकियों के बड़े समर्थन की पुष्टि करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में शांति और आप्रवासन नीतियों में बदलाव के उनके वादों ने इस समुदाय को आकर्षित किया। उनके पहले कार्यकाल में मुस्लिम-बहुल देशों पर ट्रैवल बैन जैसे फैसलों से नाराज़गी थी, लेकिन इस बार उनकी ट्यून बदलती दिखी।
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