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US Reciprocal Tariffs: दोस्तों पर डंडा, दुश्मनों पर फूल... ट्रंप के टैरिफ का ये कैसा उसूल?

ट्रंप ने 185 देशों पर टैरिफ लगाया, भारत-चीन प्रभावित, पर रूस-क्यूबा-उत्तर कोरिया को छूट! व्यापार नीति या कूटनीतिक चाल?
12:17 PM Apr 03, 2025 IST | Rohit Agrawal

Donald Trump Reciprocal Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस से एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने दुनिया को चौंका दिया। 185 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान करते हुए उन्होंने इसे "लिबरेशन डे" करार दिया। भारत पर 26%, चीन पर 34%, जापान पर 24% और ब्रिटेन पर 10% टैरिफ की मार पड़ी, लेकिन रूस, क्यूबा, उत्तर कोरिया और बेलारूस जैसे "कट्टर दुश्मनों" को छूट देकर ट्रंप ने सबको हैरत में डाल दिया। यह नीति "दोस्तों पर डंडा, दुश्मनों पर फूल" की कहावत को चरितार्थ करती दिख रही है। आखिर ट्रंप का यह टैरिफ रूल क्या कहता है, और इसके पीछे की मंशा क्या है?

क्या है ट्रंप के टैरिफ का पैटर्न?

ट्रंप पहले ही साफ़ कर चुके थे कि जो देश अमेरिका से जितना टैरिफ वसूलता है, उसका आधा अमेरिका उस पर लगाएगा। वहीं भारत अमेरिका से 52% टैरिफ लेता है, तो उसे 26% देना होगा। अफगानिस्तान 49% लेता है, लेकिन उस पर सिर्फ 10% टैरिफ लगा। हर देश पर कम से कम 10% बेसलाइन टैरिफ तो तय है ही। फिर भी, रूस जैसे देश, जो अमेरिका के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के लिए विख्यात हैं, इस लिस्ट से गायब हैं।

इसको लेकर प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सफाई दी कि रूस पर पहले से ही कड़े प्रतिबंध हैं, जो व्यापार को लगभग ठप कर चुके हैं। जबकि बता दें कि 2021 में 35 बिलियन डॉलर का रूस-अमेरिका व्यापार 2023 में घटकर 3.5 बिलियन रह गया। लेकिन सवाल यह है कि जब मॉरीशस और ब्रुनेई जैसे छोटे देशों पर टैरिफ लगा, तो रूस को क्यों बख्शा?

ट्रंप के टैरिफ में रूस को छूट क्यों?

ट्रंप का यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति वार्ता से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन रूस के साथ सीजफायर की मध्यस्थता कर रहा है, और रूस प्रतिबंधों में ढील की मांग कर रहा है। इस सप्ताह ट्रंप ने रूसी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ की धमकी दी थी, जब पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रामक बयान दिए। लेकिन टैरिफ लिस्ट में रूस की अनुपस्थिति से लगता है कि ट्रंप ने नरमी का रास्ता चुना। क्या यह शांति के लिए सौदेबाजी का हिस्सा है? लेविट ने संकेत दिया कि रूस पर और सख्त कदम संभव हैं, मगर अभी "प्रतिबंध ही काफी" का तर्क दिया जा रहा है।

भारत और जापान जैसे दोस्तों पर ट्रंप की कड़ाई

ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का झटका सबसे ज़्यादा उसके सहयोगियों को ही लगा है। भारत (26%), जापान (24%), और ब्रिटेन (10%) जैसे देशों पर टैरिफ की बड़ी चोट पड़ी है। वहीं कनाडा और मेक्सिको को इस बार छूट मिली, लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि उन पर पहले से 25% टैरिफ चल रहा है। ट्रंप ने भारत के पीएम मोदी को "अच्छा दोस्त" कहते हुए तंज कसा कि "आप हमारे साथ सही बर्ताव नहीं कर रहे।" उनका तर्क है कि ये देश अमेरिकी सामानों पर भारी टैरिफ लगाते हैं, तो जवाब देना जरूरी है। लेकिन रूस जैसे "दुश्मन" को राहत और दोस्तों पर डंडा—यह नीति विरोधाभास से भरी दिखती है।

क्या है ट्रंप का खेल?

ट्रंप का दावा है कि यह टैरिफ अमेरिकी उद्योग को पुनर्जनन देगा और व्यापार घाटे को कम करेगा। मगर रूस को छूट और सहयोगियों पर सख्ती से सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सिर्फ आर्थिक नीति है, या यूक्रेन संकट में रूस को लुभाने की कूटनीति? वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है, और भारत जैसे देशों को अपनी निर्यात रणनीति पर फिर से सोचना पड़ सकता है। ट्रंप का यह "अजब रूल" दोस्त-दुश्मन की परिभाषा को नए सिरे से लिख रहा है—जहां दोस्तों को सजा और दुश्मनों को तोहफा मिल रहा है। इसका असली नतीजा वक्त ही बताएगा।

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