ट्रंप के नहले पर अब दहला! भारत-चीन भाई-भाई, रूस भी साथ, क्या अमेरिका पड़ जाएगा अकेला?
डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बम वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूचाल ला रहा है। अमेरिका के इस नहले का जवाब देने के लिए दुनिया दहला मारने को तैयार है। भारत-चीन जैसे पुराने विरोधी अब "हिंदी-चीनी भाई-भाई" की तर्ज पर साथ आ रहे हैं, तो रूस भी इस गठजोड़ में शामिल हो गया। जापान और दक्षिण कोरिया भी ट्रंप की नीतियों से परेशान हैं। क्या ट्रंप की ये चाल उल्टी पड़ने वाली है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
ट्रंप का टैरिफ प्लान से क्यों खफा है दुनिया?
ट्रंप बुधवार को दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकते हैं। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। लेकिन ये फैसला बाकी देशों के लिए मुसीबत बन सकता है। चीन का अमेरिकी बाजार में निर्यात महंगा हो जाएगा, भारत को भी बड़ा झटका लगेगा। ट्रंप सोच रहे हैं कि ये अमेरिका का भला करेगा, पर दुनिया इसे चुपचाप सहने के मूड में नहीं। भारत, चीन और रूस जैसे देश अब ट्रंप को सबक सिखाने की तैयारी में हैं।
क्या ट्रंप के खिलाफ बनेगा नया ब्लॉक?
ट्रंप के टैरिफ ने भारत और चीन जैसे धूर विरोधियों को भी करीब ला दिया है। इस कड़ी में मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बात करते हुए सहयोग की पेशकश की। उसी दिन विदेश सचिव विक्रम मिसरी चीनी दूतावास पहुंचे, जो इस बात का एक बड़ा संकेत है। चीन ने वादा किया कि वो भारत से ज्यादा सामान खरीदेगा। 2023-24 में दोनों देशों का व्यापार 101.7 बिलियन डॉलर था, पर भारत का निर्यात सिर्फ 16.6 बिलियन। अब ये असंतुलन कम करने की बात हो रही है।
रूस-चीन के साथ मिलकर होगा ट्रंप पर वार?
चीन के विदेश मंत्री वांग यी रूस पहुंचे हैं, और ये महज संयोग नहीं। ट्रंप के टैरिफ से चीन को नुकसान होगा, तो वो रूस के साथ मिलकर जवाब तैयार कर रहा है। रूस पहले से चीन को तेल-गैस बेचता है, अब दोनों व्यापार और बढ़ा सकते हैं। रूस और चीन का ये गठजोड़ ट्रंप के लिए खतरे की घंटी है। अगर भारत भी इसमें शामिल हुआ, तो एशिया में एक ताकतवर आर्थिक ढाल बन सकती है, जो अमेरिका को अलग-थलग कर देगी।
क्या जापान-कोरिया भी देंगे साथ?
ट्रंप का टैरिफ बढ़ाने का फैसला इतना हैरानी भरा है कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी एक साथ आ गए हैं। रविवार को इन तीनों देशों के नेताओं ने मुलाकात की। बता दें कि ये देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर सामान बेचते हैं, और ट्रंप का 25% ऑटो टैरिफ इनकी कमर तोड़ सकता है। इनका प्लान है कि आपस में व्यापार बढ़ाएं और मुक्त व्यापार समझौता करें। जापान-कोरिया भले ही चीन से तनाव रखते हों, पर ट्रंप के खिलाफ ये "दुश्मन का दुश्मन दोस्त" वाली नीति अपना रहे हैं।
ट्रंप की चाल उल्टी पड़ेगी?
ट्रंप का टैरिफ अमेरिका को फायदा दे सकता है, पर वहां की जनता को महंगा सामान खरीदना पड़ेगा। दूसरी तरफ, ये दुनिया को एकजुट कर रहा है। भारत-चीन की दोस्ती, रूस का साथ और जापान-कोरिया की रणनीति ट्रंप को अकेला छोड़ सकती है। अगर ये देश मिलकर नया व्यापारिक ब्लॉक बनाते हैं, तो अमेरिका वैश्विक व्यापार में अलग-थलग पड़ सकता है। क्या ये आर्थिक जंग की शुरुआत है? ट्रंप की चाल कितनी कारगर होगी, ये वक्त बताएगा।
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