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पाकिस्तान-ईरान सीमा पर आतंकी हमला: 5 ईरानी सुरक्षा बलों की मौत

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में हुए हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया, ईरान ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया
11:04 AM Nov 11, 2024 IST | Vyom Tiwari
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पाकिस्तान और ईरान की सीमा पर हुए एक खूनी आतंकी हमले ने एक बार फिर इस इलाके में सुरक्षा की चिंताओं को बढ़ा दिया है। रविवार को हुए इस हमले में ईरान के पांच सुरक्षा बल के जवान मारे गए हैं। ये जवान रिवोल्यूशनरी गार्ड के स्वयंसेवी बासिज बल के बलूच सदस्य थे। यह घटना ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के सरवन शहर में हुई, जो पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है।

हमले का विवरण और प्रतिक्रिया

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इस हमले की जानकारी दी। हालांकि, अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इस क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ था। पिछले महीने इसी इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक प्रमुख अधिकारी समेत चार लोगों की हत्या कर दी थी।

ईरानी सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि वे इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि वे आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। इससे पहले ईरान ने बताया था कि उनके रिवोल्यूशनरी गार्ड बलों ने एक सैन्य अभियान में तीन आतंकवादियों को मार गिराया था और नौ अन्य को गिरफ्तार किया था।

क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियां

सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत ईरान का सबसे कम विकसित और अशांत क्षेत्रों में से एक है। यह इलाका अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है, जिसके कारण यहां आतंकवादी गतिविधियां और ड्रग तस्करी जैसी समस्याएं आम हैं। इस क्षेत्र में आतंकवादी समूहों, ड्रग तस्करों और ईरानी सुरक्षा बलों के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं।

इस क्षेत्र में तनाव का एक बड़ा कारण जातीय और धार्मिक मतभेद भी हैं। यहां रहने वाले सुन्नी मुस्लिम अल्पसंख्यक और ईरान के शिया बहुसंख्यक समुदाय के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। कई आतंकवादी समूह, जैसे जैश अल-अदल, इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और वे बलूच अल्पसंख्यकों के अधिकारों की मांग करते हैं।

भविष्य की चुनौतियां और समाधान

इस तरह के हमले न केवल ईरान की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी चुनौती पेश करते हैं। ईरान और पाकिस्तान दोनों को इस समस्या से निपटने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। दोनों देशों को सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

 

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