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श्रीलंका चुनाव में जीत रहे अनुरा कुमारा दिसानायके कौन हैं?

2022 में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, श्रीलंका में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं, जिसमें अनुरा कुमारा दिसानायके ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। शनिवार को हुए मतदान के बाद, उन्हें नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) के प्रत्याशी के रूप...
11:19 AM Sep 22, 2024 IST | Vibhav Shukla

2022 में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, श्रीलंका में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं, जिसमें अनुरा कुमारा दिसानायके ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। शनिवार को हुए मतदान के बाद, उन्हें नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) के प्रत्याशी के रूप में बड़ी सफलता मिली, और अब वे कर्ज में डूबे देश के नए राष्ट्रपति बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

अर्थव्यवस्था को सुधारने की उम्मीद

श्रीलंका के नागरिकों ने इस चुनाव में ऐसे नेता की खोज की थी जो उनकी नाजुक आर्थिक स्थिति को सुधार सके। दिसानायके ने शुरुआती रुझानों में 44 प्रतिशत वोट प्राप्त किए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी साजिथ प्रेमदासा को 32 प्रतिशत और वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को मात्र 15.4 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में जनता ने स्पष्ट रूप से दिखाया है कि उन्हें एक नई दिशा की तलाश है, और दिसानायके के नेतृत्व में वे इसके प्रति आशावान हैं।

कौन हैं अनुरा कुमारा दिसानायके?

अनुरा कुमारा दिसानायके, 55 साल के, अपनी जड़ों के कारण राजनीति में खास पहचान बना चुके हैं। उनका जन्म अनुराधापुरा जिले के थंबुट्टेगामा गांव में हुआ, जो कोलंबो से लगभग 170 किलोमीटर दूर है। उनके माता-पिता साधारण दिहाड़ी मजदूर और गृहिणी थे, जिन्होंने उनकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं रखी। दिसानायके ने केलानिया विश्वविद्यालय से विज्ञान की डिग्री हासिल की।

कॉलेज के दिनों में वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। 1987 से 1989 के बीच, जब श्रीलंका में सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, तब वे जेवीपी से जुड़े। उस समय को श्रीलंका के इतिहास का एक हिंसक दौर माना जाता है, जहां सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए बेरहमी दिखाई। इस दौरान करीब 60,000 लोग मारे गए, जिसमें जेवीपी के संस्थापक रोहाना विजेवीरा भी शामिल थे।

1995 में, दिसानायके ने सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन का राष्ट्रीय आयोजक बनने के बाद जेवीपी की केंद्रीय कार्यसमिति में जगह बनाई। 2000 में वे संसद में पहुंचे और 14 साल बाद पार्टी के प्रमुख बने। उन्होंने एक बार बीबीसी को दिए साक्षात्कार में अपने पिछले अपराधों के लिए माफी भी मांगी, जो जेवीपी के लिए एक बड़ा कदम था।

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अब, उनके सामने श्रीलंका की दिशा बदलने का अवसर है। 39 उम्मीदवारों के बीच से वे जीतकर निकले हैं और नए बदलाव का वादा कर रहे हैं। लेकिन उन पर लोगों की उम्मीदों का भारी दबाव है, जिसे पूरा करना आसान नहीं होगा। अब देखना है कि वे कैसे इन उम्मीदों पर खरे उतरते हैं।

अनुरा कुमारा दिसानायके, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से सांसद हैं और वे 2019 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने 2000 में पहली बार सांसद बनने के बाद 2004-2005 तक कृषि, पशुधन, भूमि और सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद, वे 2015 से 2018 तक मुख्य विपक्षी सचेतक रहे। 2014 में, उन्हें जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी (JVP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

अपने चुनाव प्रचार के दौरान, अनुरा कुमारा दिसानायके ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे जीतने के बाद 45 दिनों के भीतर संसद को भंग कर देंगे। उनका ये वादा एक नए जनादेश को हासिल करने की दिशा में है। उन्होंने अपनी नीतियों के जरिए खुद को श्रीलंका की राजनीति में एक प्रमुख नेता के तौर पर स्थापित किया है।

दिसानायके समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर सजग हैं। उनका मानना है कि सही दिशा में उठाए गए कदम ही देश के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनके चुनावी वादे और योजनाओं ने जनता में उम्मीद जगाई है कि वे एक नई शुरुआत के साथ देश की समस्याओं को हल कर सकते हैं।

चुनाव के दौरान मुद्दे और नीतियां

इस चुनाव में, दिसानायके ने भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और गरीबों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण वादे किए, जिनमें से एक संसद को 45 दिनों के भीतर भंग करना था। उन्होंने खुद को एक उदारवादी और क्रांतिकारी नेता के रूप में प्रस्तुत किया, जो देश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी नीतियों में सुधार और बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया है।

जनता का मिला व्यापक समर्थन

दिसानायके के चुनावी अभियान ने व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया है, जो दर्शाता है कि श्रीलंकाई जनता एक नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ने के लिए तैयार है। उनके द्वारा किए गए वादे और नीतियों ने लोगों के दिलों में एक नई आशा जगाई है।

अनुरा कुमारा दिसानायके की जीत केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरी श्रीलंकाई जनता के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है। उनके नेतृत्व में श्रीलंका एक नई दिशा में आगे बढ़ सकता है, जो कि अर्थव्यवस्था को सुधारने और लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए आवश्यक है। अब देखना यह है कि वे अपने वादों को कैसे पूरा करते हैं और देश को किस दिशा में ले जाते हैं।

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