भारत के सख्त रुख के बाद झुका पाकिस्तान, शहबाज शरीफ बोले- ‘पहलगाम हमले की जांच में शामिल होने को तैयार’
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ते दबाव के चलते पाकिस्तान की पुरानी अकड़ अब ढीली पड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान ने इस हमले की तटस्थ और पारदर्शी जांच में शामिल होने की इच्छा जताई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इसका ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार मुल्क की तरह जांच में भागीदारी को तैयार है।
शहबाज का बदला-बदला सुर, लेकिन चाल वही पुरानी
शहबाज शरीफ ने खैबर-पख्तूनख्वा के काकुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री अकैडमी में कैडेट्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए कहा कि, “पहलगाम की हालिया घटना सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का एक और उदाहरण है। पाकिस्तान किसी भी निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है।” हालांकि, उनके बयान में जहां एक ओर सहयोग की बात थी, वहीं दूसरी ओर भारत को जलसंकट को लेकर खुली धमकी भी दी गई।
कहा– ‘पानी रोका तो हम हर रास्ता अपनाएंगे’
शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की, तो उनके पास हर विकल्प खुले होंगे। उन्होंने कहा कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और इसे किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखा जाएगा। शरीफ ने कहा, “शांति हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अगर कोई हमारी अखंडता और सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा तो हमारी सेनाएं उसे करारा जवाब देने में सक्षम हैं।”
सिंधु जल संधि बना नया तनाव का मुद्दा
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रही सिंधु जल संधि अब एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। शहबाज शरीफ के अलावा, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने भी उग्र भाषा में बयान दिया। सिंधु नदी के किनारे एक जनसभा में उन्होंने कहा कि या तो सिंधु से हमारा पानी बहेगा, या फिर उसका खून जो हमारी हिस्सेदारी छीनना चाहता है। बिलावल ने कहा कि सिंधु दरिया पर पाकिस्तान का हक था, है और रहेगा। उनके इस बयान को भारत के प्रति एक तरह की खुलेआम धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
भारत का सख्त रुख – कोई समझौता नहीं
भारत पहले ही साफ कर चुका है कि आतंकवाद को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पहलगाम हमला इस बात का एक और उदाहरण है कि सीमापार से आतंक को बढ़ावा देने की कोशिशें अब भी जारी हैं। ऐसे में पाकिस्तान का सहयोग की बात करना कूटनीतिक मजबूरी से ज्यादा कुछ नहीं लगती।
धमकी और सहयोग दोनों भाषाएं बोल रहा है पाकिस्तान
एक ओर पाकिस्तान सहयोग की बात कर रहा है, दूसरी ओर वह पानी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर धमकी की भाषा भी अपना रहा है। यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ने के डर से पाकिस्तान अब नरम रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत अपनी नीति और सुरक्षा के मामलों में अब किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने वाला।
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