म्यांमार में भारत का Operation Brahma: 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुँचा वायुसेना का विमान
Myanmar Earthquake Operation Brahma: म्यांमार में 28 मार्च 2025 को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान चली गई। इस संकट की घड़ी में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए तुरंत कदम उठाया और ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया। भारतीय वायुसेना का एक विमान 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुँचा, जिसमें ज़रूरी सामान, भोजन और मेडिकल सहायता शामिल है। यह कदम भारत की मानवीय सहायता और पड़ोसी देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भूकंप के बाद भारत की त्वरित प्रतिक्रिया
म्यांमार में भूकंप के बाद मांडले और सागाइंग जैसे इलाकों में इमारतें ढह गईं, सड़कें टूट गईं और लोग बेघर हो गए। इस आपदा को देखते हुए भारत ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान ने हिंडन एयरबेस से उड़ान भरी और शनिवार सुबह यांगून हवाई अड्डे पर उतरा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह पहली खेप है, और आगे भी सहायता जारी रहेगी। NDRF की 8वीं बटालियन भी बचाव और राहत कार्यों के लिए म्यांमार पहुँची है।
15 टन राहत सामग्री में क्या-क्या शामिल?
इस राहत पैकेज में भूकंप प्रभावित लोगों की तात्कालिक ज़रूरतों को ध्यान में रखा गया। इसमें टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, तैयार भोजन, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, जनरेटर और पानी शुद्ध करने के उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा, मेडिकल सहायता के लिए पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सिरिंज और बैंडेज जैसी ज़रूरी दवाएँ भी भेजी गई हैं। यह सामग्री म्यांमार के उन लोगों के लिए जीवन रेखा बनेगी, जो इस आपदा में सब कुछ खो चुके हैं।
यांगून में किया औपचारिक हैंडओवर
राहत सामग्री को यांगून पहुँचाने के बाद इसे औपचारिक रूप से वहाँ के अधिकारियों को सौंपा गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि भारतीय राजदूत अभय ठाकुर ने यांगून के मुख्यमंत्री यू सोई थीन को यह पहली खेप सौंपी। यह कदम भारत और म्यांमार के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक है। जयसवाल ने कहा कि “ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारत पहले जवाब देने वाले के रूप में म्यांमार के लोगों की मदद कर रहा है।”
भारत की मानवीय भूमिका
Operation Brahma भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह संकट के समय अपने पड़ोसियों के साथ खड़ा रहता है। इससे पहले ‘ऑपरेशन दोस्त’ और ‘ऑपरेशन साधभाव’ जैसे मिशनों से भारत ने तुर्की, सीरिया और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की मदद की थी। म्यांमार में इस राहत कार्य से एक बार फिर भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भूकंप के बाद म्यांमार और थाईलैंड के लिए चिंता जताई और हर संभव मदद का भरोसा दिया था।
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