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Ram Navami 2025: कल है राम नवमी, दोपहर इतने बजे तक है पूजा की अवधि

राम नवमी को मध्याह्न मुहूर्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसे भगवान राम के सम्मान में प्रार्थना करने और अनुष्ठान करने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है।
01:43 PM Apr 05, 2025 IST | Preeti Mishra

Ram Navami 2025: रविवार, 6 अप्रैल को राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भगवान राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (Ram Navami 2025) को शुभ मध्याह्न काल में हुआ था। मध्याह्न काल आमतौर पर दिन का मध्य भाग होता है। हर साल राम नवमी के उत्सव के समय का ध्यान रखा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पवित्र क्षणों के साथ मेल खाते हों।

राम नवमी पूजा के लिए मुख्य समय

नवमी तिथि: 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे से शुरू होकर 6 अप्रैल को शाम 7:22 बजे समाप्त होगी।
मध्याह्न मुहूर्त: अनुष्ठान करने के लिए सबसे शुभ समय, सुबह 11:08 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:39 बजे समाप्त होगा

राम नवमी (Ram Navami 2025) को मध्याह्न मुहूर्त भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसे भगवान राम के सम्मान में प्रार्थना करने और अनुष्ठान करने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है।

राम नवमी के पारंपरिक उत्सव और अनुष्ठान

राम नवमी (Ram Navami Rituals) को बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है, खासकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में, जहां भगवान राम का जन्म हुआ था। उत्सव की शुरुआत भक्तों द्वारा सरयू नदी में पवित्र डुबकी लगाने से होती है। कई लोग सुबह से लेकर रात तक उपवास रखते हैं, पूरा दिन भगवान राम की दिव्य उपस्थिति की पूजा और स्मरण के लिए समर्पित करते हैं।राम नवमी के दिन भगवान राम को विशेष रूप से पंजीरी व खीर का भोग लगाया जाता है।

इस दिन बड़े-बड़े जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की सुंदर सजी हुई मूर्तियों को जय श्री राम के नारों के साथ सड़कों पर ले जाया जाता है। भारत भर के मंदिर धार्मिक उत्साह से भर जाते हैं। इस दिन भजन और रामायण के पाठ सुने जाते हैं। भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा और हवन भी आयोजित किए जाते हैं।

जैसे-जैसे पूरा देश इस भव्य अवसर की तैयारी कर रहा है, भगवान राम के प्रति भक्ति, एकता और श्रद्धा की भावना हवा में भर रही है। लाखों लोगों के लिए, राम नवमी सिर्फ़ जश्न का दिन नहीं है, बल्कि भगवान राम के गुणों - कर्तव्य, सम्मान और धार्मिकता - पर चिंतन करने का अवसर भी है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करते आ रहे हैं।

राम नवमी पूजा विधि

यहां राम नवमी पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi) दी गई है, जिसका पालन पारंपरिक रूप से भगवान श्री राम की पूजा करने के लिए भक्त करते हैं:

शुद्धिकरण- घर और पूजा स्थल को साफ करें। स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और भक्ति और पवित्रता के साथ पूजा करने का संकल्प लें।
भगवान राम की मूर्ति या चित्र रखना- सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ भगवान राम की मूर्ति या छवि को फूलों, मालाओं और रोशनी से सजाए गए एक साफ मंच पर रखें।
आवाहन और ध्यान- मंत्रों का जाप करें और भगवान राम के दिव्य रूप का ध्यान करें। "ॐ रामाय नमः" का जाप करके भगवान को अपना प्रसाद स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें।
षोडशोपचार पूजा- चंदन का लेप, फूल, धूप, दीया और नैवेद्यम चढ़ाएं। आप फल, मिठाई और तुलसी के पत्ते भी शामिल कर सकते हैं।
रामचरितमानस का पाठ करना- रामायण पढ़ें या सुनें, खासकर भगवान राम के जन्म (बाल कांड) का। आप राम रक्षा स्तोत्र या राम नाम का बार-बार जाप भी कर सकते हैं।
आरती और भजन- राम भजन या "श्री रामचंद्र कृपालु भजमन" भजन गाते हुए कपूर के दीपक से आरती करें।
भोग चढ़ाना- भोग के रूप में खीर, पंजीरी, फल या कोई भी सात्विक भोजन चढ़ाएं। पूजा के बाद इसे परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में प्रसाद के रूप में बांटें।
कन्या पूजन- देवी के नौ रूपों का सम्मान करने के लिए कन्या पूजन करें और छोटी लड़कियों को उपहार और भोजन वितरित करें।

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