नेशनलराजनीतिमनोरंजनखेलहेल्थ & लाइफ स्टाइलधर्म भक्तिटेक्नोलॉजीइंटरनेशनलबिजनेसआईपीएल 2025चुनाव

Mala Rules: जाप करने वाली माला को पहनना चाहिए या नहीं ? जानिए कारण और आध्यत्मिक महत्त्व

जप माला के नाम से जानी जाने वाली माला का उपयोग करके पवित्र मंत्रों का जाप करना सदियों से आध्यात्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है।
12:01 PM Apr 02, 2025 IST | Preeti Mishra

Mala Rules: जप माला के नाम से जानी जाने वाली माला का उपयोग करके पवित्र मंत्रों का जाप करना सदियों से आध्यात्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है। कई भक्त ध्यान, प्रार्थना और मंत्र जाप के लिए माला का उपयोग करते हैं। हालांकि, अक्सर यह सवाल उठता है: क्या किसी को जप की माला पहननी चाहिए? इसका उत्तर आध्यात्मिक मान्यताओं, परंपराओं और व्यक्तिगत प्रथाओं के आधार पर अलग-अलग होता है। आइए माला पहनने या न पहनने के पीछे के कारणों और इसके आध्यात्मिक महत्व को जानें।

जप माला का महत्व

माला या जप माला केवल मोतियों की माला नहीं है; इसमें गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से ध्यान और भक्ति के दौरान मंत्रों की गिनती के लिए किया जाता है। माला की सामग्री, जैसे कि रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन, आध्यात्मिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक मनका मंत्र की ऊर्जा को अवशोषित करता है और साधक को ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

क्या हमें जप माला पहननी चाहिए?

जप माला पहनने का निर्णय व्यक्ति की आध्यात्मिक मान्यताओं और प्रथाओं पर निर्भर करता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण दृष्टिकोण दिए गए हैं:

जप माला पहनने के कारण

दैवीय ऊर्जा के साथ निरंतर जुड़ाव। माला पहनने से भक्त को पूरे दिन दिव्य ऊर्जा से जुड़े रहने में मदद मिलती है। माला व्यक्ति के आध्यात्मिक मार्ग की याद दिलाती है। माना जाता है कि रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन से बनी माला सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करती है और पहनने वाले को नकारात्मक प्रभावों से बचाती है। आध्यात्मिक विकास को बढ़ाती है। जप माला पहनने से जप में अनुशासन बनाए रखने और आध्यात्मिक अभ्यास को मजबूत करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, रुद्राक्ष की माला में औषधीय गुण होते हैं जो मन को शांत करने, तनाव को कम करने और ऊर्जा के स्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं। जप की माला पहनना व्यक्ति की अपने देवता या गुरु के प्रति भक्ति को दर्शाता है और उन्हें उनकी आध्यात्मिक प्रतिबद्धताओं की याद दिलाता है।

जप माला न पहनने के कारण

कुछ परंपराओं के मुताबिक़ जप माला का उपयोग केवल जप के लिए किया जाना चाहिए और इसे पहना नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह आसपास की ऊर्जा को अवशोषित करती है। लेकिन कई शास्त्र सलाह देते हैं कि माला को साफ और अशुद्धियों से अछूता रखना चाहिए। इसे पहनने से यह अनावश्यक रूप से दूषित हो सकती है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि जप, पहनने और अनुष्ठानों के लिए अलग-अलग माला होनी चाहिए। कुछ आध्यात्मिक परंपराएँ माला को पहनने के बजाय उपयोग में न होने पर पवित्र स्थान पर रखने की सलाह देती हैं।

माला पहनने का आध्यात्मिक महत्व

माला पहनना आध्यात्मिक प्रगति के प्रति व्यक्ति की भक्ति और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऐसा माना जाता है कि माला पहनने से आभामंडल लगातार मजबूत होता है और दिव्य ऊर्जा प्रवाहित होती है। कई लोगों का मानना ​​है कि माला नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरे प्रभावों से आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करती है। जप माला की निरंतर उपस्थिति पहनने वाले को अपने आध्यात्मिक पथ पर ध्यान केंद्रित करने और नियमित रूप से ध्यान करने की याद दिलाती है। रुद्राक्ष या क्रिस्टल माला जैसी कुछ मालाओं के बारे में कहा जाता है कि वे शरीर में ऊर्जा केंद्रों को संतुलित करती हैं और सेहत को बढ़ावा देती हैं।

यह भी पढ़ें: Durga Ashtami 2025: 4 या 5 अप्रैल कब है अष्टमी? जानिए तिथि, कन्या पूजन विधि व मुहूर्त

Tags :
DharambhaktiDharambhakti NewsLatest Dharambhakti NewsMala Rulesrosary for chantingrosary for chanting importancerosary for chanting reasonShould we wear rosary for chantingShould we wear rosary for chanting or notजप माला का महत्वजाप करने वाली मालाजाप करने वाली माला पहनने के फायदे

ट्रेंडिंग खबरें

Next Article