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Kanya Pujan 2025: अष्टमी के दिन आज होगा कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

कन्या पूजन के अनुष्ठान में छोटी लड़कियों (1 से 10 वर्ष की आयु) को देवी दुर्गा के रूप में पूजा जाता है।
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Kanya Pujan 2025: चैत्र नवरात्रि 2025 में नौ दिनों के बजाय आठ दिन होने के कारण कन्या पूजन की सही तिथियों को लेकर भ्रम था। कन्या पूजन में मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में छोटी लड़कियों की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में इस शुभ प्रथा (Kanya Pujan 2025) का बहुत धार्मिक महत्व है और इसे आमतौर पर महाअष्टमी या नवमी के दिन मनाया जाता है। इस दिन 1 से 10 वर्ष की आयु की लड़कियों का सम्मान और भोजन कराया जाता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महाष्टमी (Kanya Pujan 2025) तिथि 4 अप्रैल को रात 8:12 बजे शुरू होगी और 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे समाप्त होगी। इसके बाद, महानवमी तिथि शुरू होगी जो 6 अप्रैल को शाम 7:22 बजे समाप्त होगी। इसलिए, महाष्टमी 5 अप्रैल को मनाई जाएगी, जबकि राम नवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी।

Kanya Pujan 2025: अष्टमी के दिन आज होगा कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

आज कन्या पूजन अनुष्ठान करने वालों के लिए, निम्नलिखित मुहूर्त अनुशंसित हैं:

मुहूर्त समय: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 बजे से सुबह 05:21 बजे तक
सुबह का मुहूर्त: सुबह 04:58 बजे से सुबह 06:07 बजे तक

कन्या पूजन (Kanya Pujan Rituals) के अनुष्ठान में छोटी लड़कियों (1 से 10 वर्ष की आयु) को देवी दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। इसे चैत्र नवरात्रि के दौरान सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक माना जाता है और माना जाता है कि यह भक्तों के लिए आशीर्वाद लाता है। अधिकतम शुभ परिणामों के लिए भक्तों को निर्दिष्ट मुहूर्त के दौरान पूजन पूरा करना चाहिए।

Kanya Pujan 2025: अष्टमी के दिन आज होगा कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

कन्या पूजन विधि

तैयारी और सफाई - पूजा स्थल को साफ करें, इसे रंगोली से सजाएं और देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र रखें। छोटी कन्याओं के लिए आरामदायक बैठने की जगह की व्यवस्था करें।
कन्याओं का स्वागत - नौ छोटी लड़कियों और एक लड़के (बटुक) को आमंत्रित करें। उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाने से पहले उनके पैर साफ पानी से धोएं।
तिलक और आरती - उनके माथे पर कुमकुम, हल्दी और अक्षत लगाएं। दिव्य स्त्री ऊर्जा से आशीर्वाद मांगते हुए दीये से आरती करें।
भोग और प्रसाद चढ़ाना - उन्हें फल और मिठाई के साथ पूरी, चना और हलवा जैसे पारंपरिक प्रसाद परोसें। सुनिश्चित करें कि वे अच्छी तरह से खाए-पिए और संतुष्ट हों।
उपहार और दक्षिणा – कृतज्ञता और सम्मान के प्रतीक के रूप में दक्षिणा के साथ चूड़ियां, कपड़े, किताबें या खिलौने जैसे उपहार दें।
आशीर्वाद लें – उनके पैर छुएं और आशीर्वाद लें, क्योंकि उन्हें देवी दुर्गा का जीवित अवतार माना जाता है।
सम्मान के साथ विदाई – विनम्रतापूर्वक उन्हें विदाई दें, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे खुशी-खुशी और सम्मानित महसूस करते हुए जाएं।

इसके बाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद वितरित करें और प्रार्थना के साथ अनुष्ठान समाप्त करें।

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