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Gudi Padwa 2025: कब शुरू होगा मराठी नव वर्ष गुड़ी पड़वा? जानिये तिथि और महत्व

गुड़ी पड़वा एक ऐसा त्योहार है जो नई शुरुआत, समृद्धि और जीत का प्रतीक है।
10:50 AM Mar 24, 2025 IST | Preeti Mishra
Gudi Padwa 2025

Gudi Padwa 2025: गुड़ी पड़वा, मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गोवा में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह हिंदू और मराठी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2025) 30 मार्च, दिन रविवार को मनाया जाएगा।

गुड़ी पड़वा के लिए शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि 29 मार्च 2025 को प्रातः 10:30 बजे प्रारंभ होगी
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 30 मार्च 2025 को प्रातः 08:55 बजे
गुड़ी पड़वा पूजा मुहूर्त: प्रातः 06:30 बजे से प्रातः 08:00 बजे तक

गुड़ी पड़वा का महत्व

गुड़ी पड़वा ((Gudi Padwa Significance) एक ऐसा त्योहार है जो नई शुरुआत, समृद्धि और जीत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी, जो समय की शुरुआत का प्रतीक है। यह रावण को हराने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने से भी जुड़ा है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

कई महाराष्ट्रीयनों के लिए, यह त्योहार छत्रपति शिवाजी महाराज की जीत और मराठा साम्राज्य की स्थापना का भी प्रतीक है। घरों के बाहर फहराया जाने वाला गुड़ी (झंडा) सफलता, शक्ति और दैवीय आशीर्वाद का प्रतीक है।

गुड़ी पड़वा कैसे मनाया जाता है?

गुड़ी फहराना- गुड़ी पड़वा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान घरों के बाहर गुड़ी फहराना है। गुड़ी को चमकीले रेशमी कपड़े, आम के पत्तों, नीम के पत्तों, फूलों की माला और एक उलटे चांदी या तांबे के बर्तन को बांस की छड़ी के ऊपर रखकर बनाया जाता है। फिर इसे प्रवेश द्वार पर या छत पर फहराया जाता है ताकि बुराई दूर हो, समृद्धि आए और विजयी शुरुआत हो।

सफाई और सजावट- त्योहार से पहले लोग अपने घरों की अच्छी तरह से सफाई करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करने के लिए अपने प्रवेश द्वार को रंग-बिरंगी रंगोली और आम के पत्तों के तोरण से सजाते हैं।

तेल स्नान और पूजा- सुबह जल्दी तेल से स्नान करना शुभ माना जाता है। परिवार विशेष पूजा करते हैं और आने वाले वर्ष के लिए समृद्ध होने के लिए भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं।

नीम और गुड़ का प्रसाद- गुड़ी पड़वा की एक अनूठी परंपरा नीम के पत्तों, गुड़ और इमली के मिश्रण का सेवन करना है। यह जीवन में कड़वे और मीठे दोनों अनुभवों को स्वीकार करने का प्रतीक है और इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

गुड़ी पड़वा पर बनाए जाने वाले खास व्यंजन

भारत में त्योहार स्वादिष्ट भोजन के बिना अधूरे हैं! गुड़ी पड़वा पर, पारंपरिक महाराष्ट्रीयन व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं

पूरन पोली - दाल और गुड़ से भरी एक मीठी रोटी
श्रीखंड-पूरी - खस्ता पूरियों के साथ परोसी जाने वाली मीठी केसर दही
कोथिंबीर वड़ी - धनिया और बेसन से बना एक स्वादिष्ट नाश्ता

गुड़ी पड़वा क्यों महत्वपूर्ण है?

गुड़ी पड़वा सिर्फ़ नए साल का जश्न नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा त्योहार भी है जिसका गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है

फसल का त्योहार: यह कटाई के मौसम की शुरुआत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। किसान इस दिन को समृद्धि और प्रचुरता के समय के रूप में मनाते हैं।
ज्योतिषीय महत्व: यह त्योहार सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही मनाया जाता है, जो एक नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक है।
सांस्कृतिक विरासत: गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक बंधन को मज़बूत करता है।

विभिन्न राज्यों में कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा उत्सव

वैसे तो गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और गोवा में व्यापक रूप से मनाया जाता है, लेकिन भारत के विभिन्न हिस्सों में भी इसी तरह के त्योहार मनाए जाते हैं:

उगादी (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक)
चैत्र नवरात्रि (उत्तर भारत)
चेटी चंद (सिंधी समुदाय)
नवरेह (कश्मीर)

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