मेट्रो शहर से बाहर घर खरीदना हुआ महंगा! पेरिफेरल इलाकों में क्यों उछल रहीं हैं प्रॉपर्टी की कीमतें?
Metro Peripheral Property Boom: पिछले कुछ सालों में भारत के प्रॉपर्टी मार्केट में एक अनोखा बदलाव देखने को मिला है। बड़े शहरों के आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें न सिर्फ तेज़ी से बढ़ी हैं, बल्कि कई मामलों में ये मेट्रो शहरों के प्रमुख क्षेत्रों को भी पीछे छोड़ रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास और लग्ज़री सुविधाओं की बढ़ती मांग ने इन पेरिफेरल इलाकों को नया निवेश हॉटस्पॉट बना दिया है। ANAROCK की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह सालों में इन क्षेत्रों ने कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा है, जिसमें बंगलुरु का गुंजूर 69% की बढ़ोतरी के साथ सबसे आगे है।
बता दें कि इस ट्रेंड के चलते बड़े शहरों के प्रीमियम इलाकों में घर खरीदना मुश्किल हो गया है। अब निवेशक और होमबायर्स शहरों की भीड़ से दूर नई जगहों पर शिफ्ट हो रहे हैं, और यही नया रियल एस्टेट बूम बना रहा है।आइए, इस ट्रेंड की गहराई में उतरकर समझते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
मेट्रो शहर के पास जमीनों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रिसर्च फर्म ANAROCK की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सात प्रमुख शहरों—दिल्ली-NCR, मुंबई, बंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता—के आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें मेट्रो शहरों के मुख्य क्षेत्रों से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी हैं। बंगलुरु के गुंजूर में 2019 में जहाँ औसत कीमत 5,030 रुपये प्रति वर्ग फीट थी, वह 2024 की तीसरी तिमाही तक 8,500 रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुँच गई। यह 69% की बढ़ोतरी दर्शाती है।
वहीं, बंगलुरु के प्रमुख इलाके थन्नीसांद्रा मेन रोड पर इस दौरान 62% की वृद्धि हुई, जहाँ कीमतें 5,175 से 8,400 रुपये प्रति वर्ग फीट तक गईं। इसी तरह, दिल्ली-NCR के द्वारका एक्सप्रेसवे पर प्रॉपर्टी की कीमतें 93% बढ़कर 5,359 से 10,350 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गईं। यह साफ है कि परिधीय इलाके अब सिर्फ किफायती विकल्प नहीं रहे, बल्कि प्रीमियम निवेश का केंद्र बन गए हैं।
दिल्ली-NCR के इन इलाकों चल रहा कीमतों का बड़ा खेल
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में भी यह ट्रेंड साफ दिखाई देता है। नोएडा एक्सप्रेसवे पर पिछले छह सालों में प्रॉपर्टी की कीमतें 66% बढ़ी हैं, जो 2019 के 5,075 रुपये प्रति वर्ग फीट से 2024 में 8,400 रुपये तक पहुँच गईं। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में भी दाम तेज़ी से बढ़े हैं, हालाँकि यहाँ कीमतें अभी भी अपेक्षाकृत कम है। दूसरी ओर, द्वारका एक्सप्रेसवे ने 93% की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की, जो इसे NCR का सबसे महँगा पेरिफेरल क्षेत्र बनाती है। बेहतर सड़कें, मेट्रो कनेक्टिविटी और नए कमर्शियल हब्स ने इन इलाकों को निवासियों और निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है।
दिल्ली NCR की इन लोकेशंस पर सबसे अधिक मारामारी:
रैंक | क्षेत्र | 2019 (₹ प्रति वर्ग फीट) | 2024 (₹ प्रति वर्ग फीट) | % वृद्धि |
---|---|---|---|---|
1️⃣ | द्वारका एक्सप्रेसवे | 5,359 | 10,350 | 93% |
2️⃣ | नोएडा एक्सप्रेसवे | 5,075 | 8,400 | 66% |
3️⃣ | न्यू गुरुग्राम | 4,620 | 7,350 | 59% |
4️⃣ | सोहना | 4,120 | 5,900 | 43% |
5️⃣ | राजनगर एक्सटेंशन (गाजियाबाद) | 3,525 | 5,050 | 43% |
आख़िर क्यों बढ़ रही है मेट्रो पेरिफेरल इलाकों की कीमत?
बता दें कि इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। दरअसल कोविड-19 महामारी के बाद लोग शहरों की भीड़ से दूर शांत और हरे-भरे इलाकों की ओर बढ़े। इन पेरिफेरल क्षेत्रों में बड़े रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स और लग्ज़री सुविधाएँ—जैसे स्विमिंग पूल, क्लब हाउस और ग्रीन स्पेस—लॉन्च हुईं, जिसने माँग को और बढ़ाया। ANAROCK ग्रुप के उपाध्यक्ष संतोष कुमार कहते हैं, “बेहतर कनेक्टिविटी और हाई स्टैंडर्ड लिविंग की माँग ने इन इलाकों को नया रूप दिया है। डेवलपर्स ने यहाँ पर्याप्त ज़मीन की उपलब्धता का फायदा उठाकर बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू किए।” मेट्रो, हाईवे और एयरपोर्ट की नज़दीकी ने इन क्षेत्रों को शहरों से जोड़ा, जिससे लोग यहाँ बसने को तैयार हुए।
भारत के सभी बड़े शहरों में भी कीमतें आसमान की ऊंचाई पर
मुंबई के पास पनवेल में प्रॉपर्टी की कीमतें 58% बढ़कर 5,520 से 8,700 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गईं, जबकि वर्ली जैसे प्राइम एरिया में 37% की बढ़ोतरी हुई। पुणे के वाघोली में 37% की वृद्धि के साथ कीमतें 6,600 रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुँचीं। कोलकाता के जोका में 51% की बढ़ोतरी देखी गई, जहाँ दाम 5,150 रुपये तक गए। चेन्नई के नवलूर में 54% और बंगलुरु के देवनहल्ली में 49% की बढ़ोतरी ने इन इलाकों को निवेशकों की नज़र में ला दिया। हैदराबाद में गचीबोवली और कोंडापुर जैसे प्रमुख क्षेत्रों ने 86% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन वहाँ बेस प्राइस कम होने से यह संभव हुआ।
भारत की टॉप 10 लोकेशंस जहां की रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में सबसे ज्यादा बढ़त हुई:
रैंक | शहर | क्षेत्र | 2019 (₹ प्रति वर्ग फीट) | 2024 (₹ प्रति वर्ग फीट) | % वृद्धि |
---|---|---|---|---|---|
1️⃣ | दिल्ली-एनसीआर | द्वारका एक्सप्रेसवे | 5,359 | 10,350 | 93% |
2️⃣ | हैदराबाद | गचीबोवली | 4,775 | 8,900 | 86% |
3️⃣ | हैदराबाद | कोंडापुर | 4,620 | 8,600 | 86% |
4️⃣ | बेंगलुरु | गुंजूर | 5,030 | 8,500 | 69% |
5️⃣ | दिल्ली-एनसीआर | नोएडा एक्सप्रेसवे | 5,075 | 8,400 | 66% |
6️⃣ | मुंबई (MMR) | पनवेल | 5,520 | 8,700 | 58% |
7️⃣ | पुणे | वाघोली | 4,820 | 6,600 | 37% |
8️⃣ | चेन्नई | नवलूर | 3,955 | 6,080 | 54% |
9️⃣ | दिल्ली-एनसीआर | न्यू गुरुग्राम | 4,620 | 7,350 | 59% |
🔟 | मुंबई (MMR) | विरार | 4,440 | 6,850 | 58% |
क्या यह ट्रेंड रुकने का नाम लेगा?
यह ट्रेंड बताता है कि मेट्रो शहरों के बाहर के इलाके अब किफायती नहीं रहे। लग्ज़री प्रोजेक्ट्स और तेज़ विकास ने इन्हें प्रीमियम बना दिया है। संतोष कुमार के मुताबिक, “कोविड के बाद लोग बड़े घरों और बेहतर जीवनशैली की ओर बढ़े हैं, जिसने इन इलाकों की कीमतें आसमान पर पहुँचा दीं।” हालाँकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या यह बढ़ोतरी स्थायी होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि कनेक्टिविटी और डिमांड बनी रही, तो ये इलाके मेट्रो शहरों को कड़ी टक्कर देते रहेंगे। लेकिन अगर माँग स्थिर हुई, तो कीमतों में सुधार भी संभव है।
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