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उदित राज ने चीफ जस्टिस पर कसा तंज, कहा-'काश मस्जिद के लिए भी प्रार्थना की होती'

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अयोध्या विवाद के समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना करने की बात कही, जिस पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
04:53 PM Oct 21, 2024 IST | Shiwani Singh
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कांग्रेस नेता उदित राज ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अयोध्या विवाद पर दिए गए बयान पर टिप्पणी की है। उदित राज ने सोमवार को कहा कि अगर मुख्य न्यायाधीश ने अन्य मुद्दों के लिए भी प्रार्थना की होती, तो वे मामले भी सुलझ जाते और आम लोगों को न्याय मिल जाता।

उदित राज ने क्या कहा

पूर्व सांसद और असंगठित श्रमिक और कर्मचारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित राज ने एक्स पर लिखा, "मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ जी ने कहा कि उन्होंने अयोध्या मुद्दे के समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना की थी। अगर उन्होंने कुछ अन्य मुद्दों के लिए भी प्रार्थना की होती, तो वे भी हल हो जाते जैसे कि एक आम आदमी बिना पैसे के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से न्याय प्राप्त कर सकता था।"

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "अगर मुख्य न्यायाधीश ने अन्य मुद्दों के लिए भी प्रार्थना की होती, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI), और आयकर विभाग (IT) के दुरुपयोग पर भी रोक लग जाती।"

पांच-न्यायाधीशों की बेंच का हिस्सा थे चंद्रचूड़

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला देने से पहले इसके समाधान के लिए प्रार्थना की थी। बता दें कि डीवाई चंद्रचूड़ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट की उस पांच-न्यायाधीशों की बेंच का हिस्सा थे, जिसका नेतृत्व तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कर रहे थे।

इस बेंच ने 9 नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया था, जो लगभग 70 साल पुराने कानूनी विवाद को समाप्त करता है।

क्या कहा चीफ जस्टिस ने

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "मैं भगवान के सामने बैठा और उनसे कहा कि आपको इसका समाधान खोजना होगा। विश्वास कीजिए, अगर आप में आस्था है, तो भगवान हमेशा एक रास्ता निकालते हैं।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अक्सर सुप्रीम कोर्ट के जजों के पास ऐसे मामले आते हैं जिनमें वे समाधान पर नहीं पहुंच पाते और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिसके लिए उन्होंने अंततः भगवान की ओर रुख किया।

क्या था विवाद

विवाद इस बात पर केंद्रित था कि क्या 16वीं शताब्दी की मुगल मस्जिद एक मंदिर को गिराकर बनाई गई थी, जिसे भगवान राम का जन्मस्थल माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की अनुमति दी, साथ ही मस्जिद के लिए वैकल्पिक पांच एकड़ भूमि आवंटित की।

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