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कर्नाटक के CM सिद्धारमैया की बढ़ी मुश्किलें, भ्रष्ट्राचार निरोधक निकाय ने दर्ज की FIR

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) द्वारा जमीन आवंटन से जुड़े कथित घोटाले मामले में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। राज्य की भ्रष्ट्राचार निरोधक निकाय ने शुक्रवार को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो कांग्रेस नेता के लिए एक बड़ा कानूनी चुनौती बन सकता है।
06:35 PM Sep 27, 2024 IST | Shiwani Singh

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) द्वारा जमीन आवंटन से जुड़े कथित घोटाले मामले में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। राज्य की भ्रष्ट्राचार निरोधक निकाय ने शुक्रवार को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो कांग्रेस नेता के लिए एक बड़ा कानूनी चुनौती बन सकता है। बता दें कि यह मामला उस समय सामने आया, जब यहां की एक विशेष अदालत ने सिद्धारमैया के खिलाफ दो दिन पहले ही लोकायुक्त पुलिस जांच के आदेश दिए हैं।

सिद्धारमैया पहले आरोपी के रूप में नामित

एफआईआर में सिद्धारमैया को पहले आरोपी के रूप में नामित किया गया है। उसके बाद उनकी पत्नी पार्वती, साले मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराज का नाम भी शामिल है, जिससे मल्लिकार्जुन स्वामी ने जमीन खरीदी और उसे पार्वती को उपहार के रुप में अपनी बहन पार्वती को दे दिया।

आरोपों के अनुसार, मैसूर विकास प्राधिकरण ने पार्वती की स्वामित्व वाली जमीन के एक हिस्से का अधिग्रहण किया और उन्हें उच्च मूल्य वाली प्लॉट्स से मुआवजा दिया। भाजपा नेतृत्व वाली विपक्ष और कुछ कार्यकर्ताओं ने सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती पर इस अवैध मुआवजा भूमि सौदे से लाभ उठाने का आरोप लगाया है।ऐसा अनुमान लगाया गया है कि कथित अनियमितताएं 4,000 करोड़ रुपए की हैं।

वहीं इससे पहले अगस्त में कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल के इस आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद पूर्व और वर्तमान सांसदों/विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों के लिए विशेष अदालत ने मैसूर में लोकायुक्त पुलिस को आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्ण द्वारा दायर शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया।

क्या है आरोप

इस शिकायत में सिद्धारमैया की पत्नी पर आरोप लगाया गया है कि उन्हें मैसूर के एक प्रमुख इलाके में मुआवजा स्वरूप प्लॉट आवंटित किए गए, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनकी जमीन से अधिक था। इसे MUDA द्वारा अधिग्रहित किया गया था। MUDA की 50:50 अनुपात योजना के तहत, पार्वती को 3.16 एकड़ भूमि के बदले प्लॉट दिए गए। हालांकि, यह भी आरोप है कि मैसूर के कसारे गांव में स्थित 3.16 एकड़ जमीन पर उनका कोई वैधानिक स्वामित्व नहीं था।

सिद्धारमैया ने आरोपों को खारिज किया

हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि भूमि सौदा नियमों के अनुसार पूरा किया गया था और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी। उन्होंने विपक्ष की उनके इस्तीफे की मांग, जो उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के अदालत के आदेश के बाद और तेज हो गई है इस भी नकार दिया।

शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए सिद्धारमैया ने दावा किया कि विपक्ष उन्हें निशाना बना रहा है, क्योंकि वे उनसे डरे हुए हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि यह उनके खिलाफ पहला ऐसा "राजनीतिक मामला" है।

सिद्धारमैया ने कहा, "मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मेरे खिलाफ पहली बार राजनीतिक मामला दर्ज किया गया है। कृपया इसे रेखांकित करें। कर्नाटक के सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश भर में विपक्ष द्वारा शासित राज्यों में सीबीआई, ईडी और राज्यपाल के कार्यालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है

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