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भारत की टेंशन बढ़ी! इंदिरा गांधी के समय वाले स्थान पर चीन का विशाल शहर, भारत का अगला कदम क्या होगा?

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय में पाकिस्तान को दो टुकड़ों में विभाजित कर बांग्लादेश की स्थापना की गई थी। लेकिन अब...
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China-Bangladesh Economic Zone: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय में पाकिस्तान को दो टुकड़ों में विभाजित कर बांग्लादेश की स्थापना की गई थी। लेकिन अब उसी बांग्लादेश के चटगांव में चीन एक बड़ा औद्योगिक शहर बनाने जा रहा है। यह चीन की एक नई रणनीतिक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत वह बांग्लादेश के चटगांव और मोंगला बंदरगाह के जरिए हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पैठ को और गहरा करने की योजना बना रहा है। (China-Bangladesh Economic Zone)शुक्रवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, मोहम्मद यूनुस और चीनी राष्ट्रपति, शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात में कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें से एक प्रमुख समझौता चटगांव में एक बड़ा औद्योगिक आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने का था।

चीन औद्योगिक क्षेत्र में निवेश करेगा

चीन इस औद्योगिक क्षेत्र को बांग्लादेश के चटगांव में 750 एकड़ भूमि पर स्थापित करेगा। यह परियोजना चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत विकसित की जाएगी, जिससे चीन के लिए दक्षिण एशिया में आर्थिक और सामरिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस औद्योगिक क्षेत्र में चीन की कंपनियां भारी निवेश करेंगी, खासकर हवाई जहाज निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और गारमेंट्स उद्योग में। इस परियोजना के माध्यम से बांग्लादेश में 75,000 से अधिक नौकरियों का सृजन होने की संभावना है, जो वहां के बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़े अवसर के रूप में सामने आएगा।

मोंगला बंदरगाह का आधुनिकीकरण

चीन के लिए मोंगला बंदरगाह एक सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है और समुद्री व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। चीन अब इस बंदरगाह को आधुनिक बनाएगा और इसकी क्षमता बढ़ाएगा, जिससे यह बड़े कंटेनर जहाजों के लिए उपयुक्त बन सकेगा। इस योजना में नए जेटी बनाए जाएंगे और इसे समुद्री सिल्क रोड का हिस्सा बनाने की योजना है। इससे न सिर्फ बांग्लादेश का व्यापार बढ़ेगा, बल्कि चीन को दक्षिण एशिया में अपनी समुद्री शक्ति को और मजबूत करने का मौका मिलेगा।

भारत के लिए चुनौती

रणनीतिक घेराबंदी : चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न बंदरगाहों पर अपनी उपस्थिति बढ़ाना है। पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा, और अब बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह पर चीनी प्रभाव से भारत को समुद्री मार्गों में चुनौती मिल सकती है। मोंगला बंदरगाह का आधुनिकीकरण और चीन का इस पर बढ़ता प्रभाव भारत की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए खतरे की घंटी हो सकता है।

आर्थिक प्रभाव: चीन का औद्योगिक क्षेत्र और मोंगला बंदरगाह बांग्लादेश को एक प्रमुख व्यापार और निवेश केंद्र बना सकता है, जिससे चीन की कंपनियों का दबदबा वहां बढ़ सकता है। इससे भारत के आर्थिक हितों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि बांग्लादेश में निवेश करने के साथ-साथ भारत को चीन के मुकाबले अपनी उपस्थिति बढ़ाने में कठिनाइयाँ आ सकती हैं।

भारत के लिए चुनौती

चीन का मोंगला बंदरगाह का सैन्य उपयोग एक दीर्घकालिक खतरा साबित हो सकता है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी के मद्देनजर, यह बंदरगाह भविष्य में एक सैन्य अड्डे के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बांग्लादेश का बीजिंग के प्रति झुकाव भारत के लिए खतरे की बात है, क्योंकि यह क्षेत्रीय सामरिक शक्ति को प्रभावित कर सकता है।

भारत की प्रतिक्रिया...

भारत ने इस बढ़ती रणनीतिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने मोंगला बंदरगाह के एक टर्मिनल के संचालन अधिकार हासिल किए हैं, जिसे इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) संभालेगा। साथ ही, भारत ने बांग्लादेश में खुलना-मोंगला रेल लाइन जैसे परियोजनाओं में निवेश किया है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" और "एक्ट ईस्ट" नीति के तहत, वह बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

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